गाजियाबाद

लोनी में चुनावी चौसर बिछी, भाजपा में टिकट को लेकर बढ़ी खींचतान

वर्तमान विधायक के सामने अनिल कसाना प्रमुख की दावेदारी चर्चा में, रालोद से मनोज धामा का नाम भी सुर्खियों में;

जयंत चौधरी से मुलाकात की चर्चाओं ने बढ़ाई सियासी हलचल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद :  विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन लोनी विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। भाजपा, राष्ट्रीय लोकदल, सपा और बसपा में संभावित प्रत्याशियों को लेकर चर्चाओं और कयासों का दौर चरम पर है। चाय की दुकानों से लेकर गांवों की चौपालों और राजनीतिक बैठकों तक एक ही सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में कौन सा दल किस चेहरे पर दांव लगाएगा।
सबसे अधिक चर्चा भाजपा के टिकट को लेकर हो रही है। वर्तमान भाजपा विधायक जहां लगातार क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं, वहीं अनिल कसाना प्रमुख भी भाजपा प्रत्याशी की दौड़ में शामिल बताए जा रहे हैं। अनिल कसाना प्रमुख की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता और क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क को उनकी मजबूत दावेदारी के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा के भीतर टिकट को लेकर संभावित प्रतिस्पर्धा ने मौजूदा विधायक की राजनीतिक बेचैनी बढ़ाने की चर्चाओं को भी हवा दे दी है।
विधायक और अनिल कसाना की सक्रियता चर्चा में
वर्तमान भाजपा विधायक क्षेत्र में लगातार कार्यक्रमों में पहुंचकर जनता से संपर्क बनाए हुए हैं। दूसरी ओर अनिल कसाना प्रमुख भी विभिन्न सामाजिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। दोनों नेताओं की सक्रियता को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह के राजनीतिक समीकरण लगाए जा रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि टिकट का फैसला केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता से नहीं, बल्कि संगठन में पकड़, क्षेत्रीय जनाधार, सामाजिक समीकरण, पार्टी नेतृत्व के साथ संपर्क और चुनाव जिताने की क्षमता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।
भाजपा में टिकट के संभावित दावेदारों की सक्रियता को देखते हुए आने वाले दिनों में मुकाबला और रोचक होने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व अंततः किस चेहरे पर भरोसा करता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
रालोद से मनोज धामा का नाम भी चर्चा में
भाजपा के अलावा राष्ट्रीय लोकदल से मनोज धामा का नाम भी लोनी की सियासत में प्रमुखता से चर्चा में है। मनोज धामा की क्षेत्र में राजनीतिक सक्रियता और जनसंपर्क को देखते हुए रालोद के संभावित मजबूत चेहरे के रूप में उनकी चर्चा हो रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में रालोद की संभावित रणनीति और उम्मीदवार चयन पर भी लोनी के राजनीतिक समीकरण काफी हद तक निर्भर कर सकते हैं।
जयंत चौधरी को लेकर विधायक की प्रतिक्रिया भी बनी राजनीतिक चर्चा
राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के खिलाफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ओर से दिए गए बयान पर वर्तमान भाजपा विधायक द्वारा प्रतिक्रिया दिए जाने को भी स्थानीय राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक हलकों में इसे जाट समाज और रालोद समर्थकों के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
हालांकि विधायक की प्रतिक्रिया के पीछे वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य क्या था, इस पर कोई आधिकारिक स्थिति सामने नहीं आई है, लेकिन इस घटनाक्रम ने लोनी की चुनावी चर्चाओं को जरूर और हवा दी है।
केसी त्यागी के माध्यम से जयंत चौधरी से मुलाकात की चर्चा
इसी बीच लोनी की राजनीति में एक और चर्चा ने हलचल पैदा कर दी है। क्षेत्र में यह चर्चा चल रही है कि भाजपा के एक बड़े नेता के माध्यम से केसी त्यागी द्वारा लोनी के एक जनप्रतिनिधि की मुलाकात रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी से कराई गई।
इस मुलाकात की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है और संबंधित पक्षों की ओर से भी इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए इसे अभी राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है। लेकिन यदि यह चर्चा सही साबित होती है तो लोनी के चुनावी समीकरणों में संभावित बदलाव को लेकर चल रही अटकलों को और बल मिल सकता है।
भाजपा में टिकट की दौड़ में कई चेहरे
लोनी में भाजपा के भीतर भी टिकट को लेकर कई नेताओं की सक्रियता चर्चा में है। कुछ नेता लगातार होर्डिंग्स और बोर्ड के माध्यम से अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं, तो कुछ सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच पहुंच बना रहे हैं।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार भाजपा में एक धड़ा वर्तमान विधायक के स्थान पर नए चेहरे को मौका दिए जाने की पैरवी कर रहा है। वहीं विधायक समर्थक लगातार क्षेत्र में अपनी पकड़ और उपलब्धियों को जनता के बीच रखने में जुटे हैं।
ऐसे में वर्तमान विधायक बनाम अनिल कसाना प्रमुख की संभावित राजनीतिक प्रतिस्पर्धा आने वाले समय में भाजपा की स्थानीय राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकती है।
सपा-बसपा के चेहरे भी समीकरण बदल सकते हैं
दूसरी ओर सपा और बसपा भी लोनी विधानसभा क्षेत्र में मजबूत चेहरे की तलाश में बताए जा रहे हैं। यदि इनमें से कोई दल मजबूत स्थानीय जनाधार वाले प्रत्याशी को मैदान में उतारता है तो उसका सीधा प्रभाव भाजपा और रालोद के चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।
लोनी में जातीय और सामाजिक समीकरणों के साथ-साथ स्थानीय मुद्दे, विकास कार्य, कानून-व्यवस्था, जलभराव, सड़क, सफाई, रोजगार और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की जनता के बीच पहुंच भी चुनावी मुद्दे बन सकते हैं।
अभी टिकट की बात दूर, लेकिन चुनावी तैयारी शुरू
हालांकि राजनीतिक दलों की ओर से अभी प्रत्याशियों के नामों को लेकर कोई कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, लेकिन संभावित दावेदारों की सक्रियता साफ संकेत दे रही है कि चुनावी तैयारी पर्दे के पीछे शुरू हो चुकी है।
भाजपा में वर्तमान विधायक और अनिल कसाना प्रमुख की दावेदारी, रालोद में मनोज धामा की सक्रियता तथा सपा-बसपा की संभावित रणनीति आने वाले समय में लोनी के राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय कर सकती है।
फिलहाल लोनी की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाजपा अपना वर्तमान चेहरा बरकरार रखेगी या अनिल कसाना प्रमुख जैसे नए दावेदार पर भरोसा जताएगी। इसके साथ ही यदि सपा , बसपा भी मजबूत प्रत्याशी के साथ मैदान में उतरती है तो मुकाबला बहुकोणीय होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
चुनावी बिगुल बजने में भले ही अभी समय हो, लेकिन लोनी में टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं ने चुनावी माहौल को पहले ही गर्म कर दिया है। आने वाले दिनों में नेताओं की बढ़ती सक्रियता और राजनीतिक मुलाकातें यह तय करेंगी कि आज की चर्चाएं कल के चुनावी समीकरण में कितना बड़ा बदलाव लाती हैं।
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