बागपत
माया त्यागी कांड और शिकोहपुर के मदन प्रधान की जेल यात्रा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। वर्ष 1980 का माया त्यागी कांड बागपत और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इतिहास की एक ऐसी घटना है, जिसने पुलिस कार्रवाई के खिलाफ बड़े जनआंदोलन को जन्म दिया। इस आंदोलन में शिकोहपुर के मदन प्रधान की भूमिका भी उल्लेखनीय रही।
मदन प्रधान की शादी माया त्यागी कांड की घटना से ठीक एक दिन पूर्व हुई थी। शादी की खुशियां अभी पूरी तरह थमी भी नहीं थीं कि अगले ही दिन माया त्यागी कांड के विरोध में शुरू हुए आंदोलन में सक्रिय होने के कारण मदन प्रधान को जेल जाना पड़ा। परिवार के लिए यह प्रसंग खुशी से गम और संघर्ष में बदल जाने वाला यादगार अध्याय बन गया।
माया त्यागी प्रकरण के विरोध में हुए आंदोलन में जेल जाने वालों में ओमवीर तोमर, ईश्वर बामनौली एडवोकेट, इंद्रपाल तुगाना, मदन प्रधान और ओमप्रकाश चौटाला के नाम बताए जाते हैं।
स्वतंत्रता सेनानी की विरासत से जुड़े थे मदन प्रधान
मदन प्रधान शिकोहपुर के उस परिवार से जुड़े थे, जिसकी पहचान संघर्ष और बलिदान की परंपरा से रही है। वे वीर साहब सिंह तोमर के वंशज बताए जाते हैं, जिन्होंने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति प्राप्त की थी।
इस तरह शिकोहपुर के इतिहास में साहब सिंह तोमर का स्वतंत्रता संग्राम का बलिदान और मदन प्रधान की माया त्यागी कांड के विरोध में जेल यात्रा संघर्ष की दो पीढ़ियों को जोड़ती दिखाई देती है।
मदन प्रधान की कहानी इसलिए भी खास है कि जिस दिन उनके घर शादी की खुशियां थीं, उसके अगले ही दिन उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधा से ऊपर उठकर आंदोलन का रास्ता चुना और जेल चले गए। यही प्रसंग आज भी शिकोहपुर के बुजुर्गों की स्मृतियों में उस दौर की संघर्षशील भावना के रूप में याद किया जाता है।
शिकोहपुर के मदन प्रधान की यह कहानी बताती है कि इतिहास केवल बड़े नेताओं से नहीं बनता, बल्कि गांवों के वे सामान्य लोग भी इतिहास का हिस्सा बनते हैं, जो अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस करते हैं।



