दिल्ली

दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट खुद ‘कैंसर’ से पीड़ित, हाई-एंड मशीनें वर्षों से बंद: देवेंद्र यादव

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि गरीबों और जरूरतमंदों को सस्ता व बेहतर कैंसर इलाज देने के लिए बनाया गया दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट खुद बदहाली का शिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 में करीब 15.42 करोड़ रुपये की लागत से लगाई गई मेडिकल साइक्लोट्रॉन सहित कई हाई-एंड मशीनें प्रशिक्षित मानव संसाधन के अभाव में अप्रैल 2022 से बंद पड़ी हैं।

यादव ने कहा कि कभी प्रतिदिन करीब 1,500 मरीजों का इलाज करने वाले संस्थान में अब व्यवस्थाओं की बदहाली के कारण लगभग 500 मरीज ही पहुंच पा रहे हैं। संस्थान में 40 प्रतिशत से अधिक स्वीकृत पद खाली हैं और वर्ष 2018 से नियमित निदेशक की नियुक्ति नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि कई कीमोथेरेपी वार्ड बंद हैं, करोड़ों रुपये की मशीनें धूल खा रही हैं और मुफ्त इलाज के दावों के बावजूद मरीजों को पीईटी-सीटी स्कैन, अन्य जांच और दवाइयां बाहर से महंगे दामों पर खरीदनी पड़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि अस्पताल के वेटिंग एरिया में गंदगी और बदबू तथा छतों से लटकते वेंटिलेटर जैसी स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली को दर्शाती है।

देवेंद्र यादव ने दिल्ली सरकार के डिजिटल हेल्थ केयर सिस्टम के दावों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष सामने आई स्थिति और 7 अगस्त के आदेश से सरकारी अस्पतालों में नेक्स्टजेन हॉस्पिटल मैनेजमेंट इनफॉर्मेशन सिस्टम को समान रूप से लागू करने की जरूरत स्पष्ट हुई है। इसके बावजूद अस्पतालों में दवाइयों और जांच की सुविधाएं आम लोगों की पहुंच से बाहर हैं।

उन्होंने कहा कि समस्या केवल कैंसर इंस्टीट्यूट तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली सरकार के सभी 38 अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। हाईकोर्ट को सौंपी गई रिपोर्ट और सीएजी की रिपोर्ट में भी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे, उपकरणों और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े सवाल सामने आए हैं। यादव ने आरोप लगाया कि 26 सरकारी अस्पतालों में करोड़ों रुपये के जीवनरक्षक उपकरण स्टाफ की कमी और तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े हैं।

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों, सर्जनों और नर्सों के बड़ी संख्या में पद खाली होने के कारण कई अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर और वेंटिलेटर तक बंद पड़े हैं। “यह भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार का विकसित मॉडल है, जिसमें सरकारी अस्पतालों में 50 से 96 प्रतिशत तक पद खाली पड़े हैं।”

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