गाजियाबाद
रेड फ्लेम विवाद के बाद पंचायतों ने उजागर की लोनी के बीच शहरी व ग्रामीण सियासत की खाई
भाईचारे और सौहार्द के मुद्दे से शुरू हुआ विवाद पंचायतों तक पहुंचा, कथित वीडियो के बाद गुर्जर समाज में आक्रोश; अन्य समाजों के नेताओं की चुप्पी पर भी अब उठ रहे सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : पांच सितंबर को लोनी नंबर-2 बस स्टैंड के निकट स्थित रेड फ्लेम रेस्टोरेंट में हुए विवाद ने क्षेत्र की राजनीति को एक बार फिर आमने-सामने ला दिया है। शहरी क्षेत्र से शुरू हुआ यह विवाद अब लगातार गांवों में आयोजित पंचायतों तक पहुंच चुका है। घटनाक्रम ने लोनी की राजनीति में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच मौजूद अंतर तथा नेताओं की राजनीतिक सक्रियता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, रेड फ्लेम प्रकरण के दौरान भाजपा के स्थानीय नेता अनिल कसाना, पूर्व चेयरमैन डॉ. विनोद सिंह बंसल और ईश्वर मावी की ओर से लोनी में भाईचारे और आपसी सौहार्द को लेकर प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की गई थी। इसी दौरान लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर के वहां पहुंचने के बाद कथित तौर पर तीखी नोकझोंक और अभद्र भाषा के इस्तेमाल का मामला सामने आया। बाद में कथित गाली-गलौज से संबंधित वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद और अधिक गहरा गया।
कथित वीडियो के बाद गुर्जर समाज में विरोध
विधायक से संबंधित कथित वीडियो सामने आने के बाद गुर्जर समाज के कई लोगों ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए समाज के लोगों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। इसके बाद क्षेत्र में बैठकों और पंचायतों का सिलसिला शुरू हुआ। टीला शाहबाजपुर, गढ़ी कटैया और रिश्तल समेत विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में हुई पंचायतों ने मामले को केवल दो पक्षों के बीच का विवाद न रहने देकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बना दिया।
हालांकि प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भाईचारे और आपसी सौहार्द को केंद्र में रखकर बात रखने वाले मुस्लिम, दलित, ब्राह्मण और जाट समाज से जुड़े कई नेताओं की ओर से बाद के घटनाक्रम में सार्वजनिक तौर पर अपनी सक्रियता नहीं दिखाई । इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि प्रारंभिक मुद्दा सर्वसमाज के भाईचारे और क्षेत्र की शांति से जुड़ा था, तो बाद की पंचायतों में व्यापक सामाजिक भागीदारी क्यों नजर नहीं आई।
शहर में उठा सवाल, गांवों में पहुंची सियासत
रेड फ्लेम प्रकरण की शुरुआत लोनी के घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र से हुई थी। ऐसे में यह अपेक्षा की जा सकती थी कि मामले पर शहर के नागरिक संगठनों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संवाद के जरिए समाधान की कोशिश होती। इसके बजाय विवाद का राजनीतिक केंद्र धीरे-धीरे ग्रामीण क्षेत्रों की पंचायतें बन गया।
पंचायतों में नेताओं के समर्थन, विरोध, सम्मान और राजनीतिक वर्चस्व से जुड़े मुद्दे प्रमुख होते गए। इससे यह चर्चा भी तेज हुई कि शहरी मतदाताओं की रोजमर्रा की समस्याएं सड़क, जलभराव, सफाई, बिजली, पेयजल और यातायात इस राजनीतिक संघर्ष के बीच कहीं पीछे तो नहीं छूट गई हैं।
पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है। सवाल उठ रहा है कि जिस समय विवाद बढ़ रहा था, उस समय पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने और दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए। संबंधित नेताओं की ओर से पुलिस कमिश्नर के समक्ष सुरक्षा और कार्रवाई को लेकर गुहार लगाए जाने के बाद मामला और गंभीर राजनीतिक रूप लेता गया।
यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही पुलिस और प्रशासन प्रभावी हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को शांत कराते तथा कानून के दायरे में कार्रवाई सुनिश्चित करते, तो क्या विवाद को पंचायतों और व्यापक राजनीतिक संघर्ष तक पहुंचने से रोका जा सकता था। इन सवालों के स्पष्ट जवाब अभी सार्वजनिक रूप से सामने आना बाकी हैं।
पंचायतों का दौर और 2027 की सियासत
लगातार हो रही पंचायतों ने इस पूरे प्रकरण को आगामी विधानसभा चुनाव की संभावित राजनीतिक तैयारियों से भी जोड़ दिया है। एक तरफ विधायक नंदकिशोर गुर्जर के समर्थन में सामाजिक स्तर पर बैठकें और पंचायतें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर अनिल कसाना, डॉ. विनोद बंसल और ईश्वर मावी से जुड़े समर्थक भी अलग-अलग स्तर पर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
ऐसे में रेड फ्लेम प्रकरण अब केवल पांच सितंबर की घटना तक सीमित नहीं रह गया है। यह लोनी की राजनीति में सामाजिक समीकरण, ग्रामीण प्रभाव, शहरी मतदाताओं की भूमिका और वर्ष 2027 की संभावित राजनीतिक दिशा को लेकर चल रही व्यापक खींचतान का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि भाईचारे और सौहार्द के नाम पर शुरू हुई राजनीतिक पहल आखिर पंचायतों और वर्चस्व की सियासत तक कैसे पहुंच गई और इस पूरे घटनाक्रम में आम शहरी नागरिकों के मूल मुद्दे कब चर्चा के केंद्र में आएंगे यह तो आने वाला समय ही बताएगा


