गाजियाबाद
फर्रुखनगर में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर उठे सवाल
पुलिस व संबंधित विभागों की कार्य-प्रणाली संदेह के घेरे में
श्री जी फायरवर्क्स पर नियमों के विरुद्ध पटाखे बेचने का आरोप, शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा; हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी?
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण और पटाखों की बिक्री को लेकर न्यायालयों तथा संबंधित विभागों की ओर से समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन थाना टीला मोड़ क्षेत्र की फर्रुखनगर चौकी के अंतर्गत पटाखों की बिक्री और कथित निर्माण को लेकर क ई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि फर्रुखनगर स्थित श्री जी फायरवर्क्स (SHREE JEE FIREWORKS) पर नियमों के विरुद्ध पटाखों की बिक्री की जा रही है। शिकायतकर्ता का दावा है कि शिकायत किए जाने के बावजूद अब तक सम्बंधित व्यापारी के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले में थाना टीला मोड़ पुलिस, फर्रुखनगर चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों और एसओजी टीम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता पवन की ओर से आरोप लगाया गया है कि पटाखा कारोबारियों को कथित रूप से सम्बंधित विभागों द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है इस कारण ही नियम व कानून को ताक पर रखकर यहां पटाखों के निर्माण व बिक्री से सम्बंधित कार्य चल रहा है
पुलिस, प्रदूषण विभाग और संबंधित अधिकारी क्या कर रहे हैं?
पटाखों की बिक्री और भंडारण के लिए लाइसेंस, निर्धारित स्थान, अग्निशमन व्यवस्था तथा सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि किसी प्रतिष्ठान पर नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलती है, तो संबंधित पुलिस, अग्निशमन विभाग, जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से क्या जांच की जा रही है?
क्या संबंधित विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं? यदि पटाखों का निर्माण, भंडारण या बिक्री बिना आवश्यक अनुमति अथवा सुरक्षा मानकों के फरुखनगर में उल्लंघन के साथ हो रही है, तो समय रहते जांच कर कार्रवाई करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। हालांकि, फर्रुखनगर में पटाखों के अवैध निर्माण या बिक्री की स्थिति की पुष्टि सक्षम विभागों की जांच से ही हो सकेगी।
पिछले वर्ष मनमाने दामों पर बिक्री का आरोप
स्थानीय स्तर पर पिछले वर्ष पटाखों की बिक्री के दौरान भी मनमाने दाम वसूले जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस दौरान पुलिस और संबंधित विभागों की ओर से प्रभावी निगरानी नहीं की गई। हालांकि, पुलिस की मिलीभगत, संरक्षण अथवा विभागीय मौन सहमति के आरोपों की पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य और आधिकारिक जांच आवश्यक है।
यदि बाजार में निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर बिक्री होती है या उपभोक्ताओं से अनुचित कीमतें वसूली जाती हैं, तो इसकी जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले वर्ष पटाखों की बिक्री की कितनी जांच हुई और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई।
एनजीटी और न्यायालयों के निर्देशों का पालन जरूरी
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), सर्वोच्च न्यायालय तथा संबंधित प्रशासनिक और प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरणों के निर्देशों के तहत पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर लागू प्रतिबंधों का पालन आवश्यक है। हालांकि, हर जिले में लागू व्यवस्था, अनुमत पटाखों की श्रेणी और बिक्री की समय-सीमा संबंधित आदेशों के अनुसार अलग हो सकती है।
वर्ष 2026 में पटाखों की बिक्री से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि गाजियाबाद में किस प्रकार के पटाखों की बिक्री की अनुमति है, किन तारीखों में बिक्री की जा सकती है और किन स्थानों पर अस्थायी दुकानें लगाने की अनुमति दी गई है। केवल ग्रीन क्रैकर्स की अनुमति है या अन्य प्रतिबंध भी लागू हैं, इसकी पुष्टि संबंधित प्रशासनिक आदेशों से की जानी चाहिए।
दुकान के लाइसेंस से लेकर अग्निशमन व्यवस्था तक हो जांच
प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की जा रही है कि फर्रुखनगर स्थित श्री जी फायरवर्क्स सहित संबंधित पटाखा प्रतिष्ठानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में निम्न बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
पटाखों की बिक्री और भंडारण के लिए वैध लाइसेंस तथा आवश्यक अनुमतियां।
पटाखों के निर्माण अथवा भंडारण की अनुमति, यदि ऐसा कार्य किया जा रहा है।
दुकान का निर्धारित स्थान, सुरक्षित दूरी और अग्निशमन उपकरणों की उपलब्धता।
अनुमत पटाखों की श्रेणी, बिक्री की तारीखें और समय तथा लागू प्रतिबंध।
पटाखों की खरीद-बिक्री से जुड़े नियमों और सुरक्षा मानकों का अनुपालन।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस और संबंधित विभागों की ओर से की गई कार्रवाई का विवरण।
यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
हादसा हुआ तो जवाबदेही किसकी होगी?
पटाखों के निर्माण, भंडारण और बिक्री में लापरवाही आग लगने तथा जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि किसी प्रतिष्ठान पर नियमों की अनदेखी होती है और समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो जवाबदेही कैसे तय होगी?
क्या प्रशासन किसी संभावित हादसे के बाद ही सक्रिय होगा, या समय रहते जांच कर सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पटाखों के कारोबार में सुरक्षा मानकों की अनदेखी केवल कारोबारी प्रतिष्ठान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आसपास के दुकानदारों, स्थानीय निवासियों और राहगीरों की सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकती है।
मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों और पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों से शिकायत किए जाने की बात कही जा रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन शिकायत का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं और यदि नियमों का उल्लंघन मिलता है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध क्या कार्रवाई होती है।
फिलहाल, आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।


