झुंझुनू

हीरवाना को नवगठित ग्राम पंचायत गढला कलां में शामिल करने का भारी विरोध जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

हीरवाना के ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को दी विधानसभा, लोकसभा और पंचायती राज चुनावों के बहिष्कार की चेतावनी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

 चंवरा। हाल ही में राजस्थान सरकार द्वारा नव पंचायतों का गठन किया गया है। ऐसे ही ग्राम पंचायत मैनपुरा में से गढला कलां को नवगठित ग्राम पंचायत बनाया गया है। जिसमे राजस्व गांव हीरवाना को भी शामिल किया गया है। जिससे हीरवाना के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। गुरुवार को ग्रामीण जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन कर हीरवाना को ग्राम पंचायत मैंनपुरा में वापस जोड़ने के लिए जिला कलेक्टर अरुण गर्ग को ग्राम पंचायत मैनपुरा के प्रस्ताव सहित ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने कहा कि हमें वापस ग्राम पंचायत मैनपुरा में ही जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत मैनपुरा के पूर्व प्रस्ताव में भी हीरवाना को मैनपुरा के साथ ही दर्शाया गया था। लेकिन अंतिम समय में बिना किसी पूर्व सूचना के हीरवाना को गढला कला पंचायत में जोड़ दिया गया। जिससे ग्रामीण आपत्ति दर्ज भी नहीं करवा सके। जो हीरवाना की समस्त जनता के हितों के साथ कुठारा घात है। ग्रामीणों ने बताया कि हिरवाना की दक्षिण पश्चिम सीमा से गढला कलां की दूरी 12 से 15 किलोमीटर पड़ती है जबकि हीरवाना सीमा से ग्राम पंचायत मैनपुरा की दूरी 700 मीटर ही है। गढला कलां पंचायत जाने के लिए हीरवाना के लोगों को मैनपुरा पंचायत को पार कर फिर जाना पड़ेगा। जो हमें कतई स्वीकार नहीं है। गढला कलां की जनसंख्या भी वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 2588 है। राजस्थान सरकार के निर्देशानुसार नवगठित ग्राम पंचायत की संख्या 2550 पर निर्धारित की गई है। ऐसे में हीरवाना को मैनपुरा में जोड़ने से गढला कलां पंचायत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। लेकिन हीरवाना के लोगों को मैनपुरा नजदीक होने से काफी फायदा मिलेगा। हीरवाना के लोग दैनिक रोजमर्रा की वस्तुएं खरीदने एवं बच्चे अध्ययन करने के लिए भी मैनपुरा ही आते हैं। इसलिए आपत्ति दर्ज कर नवगठित ग्राम पंचायत के आदेश में संशोधन कर हीरवाना को ग्राम पंचायत मैनपुरा में शामिल किया जाए। ग्रामीणों ने राजस्थान सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि हमें मैनपुरा में नहीं जोड़ा गया तो आने वाले लोकसभा, विधानसभा एवं पंचायती राज चुनावों का बहिष्कार किया जाएगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी राजस्थान सरकार और प्रशासन की होगी। इस दौरान कैप्टन रामावतार लंमोड़, खेमचंद कड़ाला, जेपी महरानियां, लोकेश कुमार सैनी, सूबेदार किशोर मूंड, दातार सिंह शेखावत, महेंद्र चबरवाल, रामकुमार बारवाल, सज्जन, जगदीश सिंह, पालाराम, घासीराम सैनी, रोहिताश महण, श्रवण कुमार गुर्जर, नरेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह, रामकरण, धूड़ारम सहित काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

 

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