गाजियाबाद

झाड़ू ने भी  ली छुट्टी, सफाई रही सिर्फ कागजों पर

लोनी में मिशन नहीं मजाक बना स्वच्छता अभियान 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी तहसील क्षेत्र में आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर सरकार का बड़ा सपना — “एक दिन, एक घंटा, एक दिन का श्रमदान” — केवल आदेश पुस्तिका तक ही सीमित रह गया। प्रदेश सरकार ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक स्वच्छता ही सेवा – स्वच्छोत्सव अभियान पूरे जोर-शोर से चलाने के निर्देश दिए थे। लेकिन लोनी में यह अभियान इतना ‘गुप्त’ रूप से मनाया गया कि न नागरिकों को पता चला और न ही कूड़े के ढेर को।
सड़क किनारे पड़ी गंदगी ने शायद यह सोच लिया कि –
“सरकार हमें हटाएगी नहीं, क्योंकि हम ही तो उनके काम का सबूत हैं।”
गली-मोहल्लों में गंदगी पहले जैसी ही जमघट लगाए बैठी रही। झाड़ू की आवाज़ की जगह सिर्फ सरकारी फाइलों की खड़खड़ाहट सुनाई दी।
अधिकारियों ने आदेशों का पालन करने में भी कमाल कर दिया –
बैठकों में फोटो खिंचवाई होगी, रिपोर्ट बना दी होगी, और फाइल पर ‘किया गया’ लिख दिया होगा। न कोई प्रचार-प्रसार, न बैनर, न पोस्टर, न सफाई कर्मचारी की झलक। नागरिक पूछ रहे हैं कि यह अभियान चला भी था या सिर्फ व्हाट्सएप ग्रुप में ही मनाया गया?
स्थानीय लोग मजाक में कह रहे हैं –
“शायद स्वच्छता अभियान भी लोनी की धूल देखकर डर गया और भाग खड़ा हुआ!”
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर नागरिकों को गिफ्ट में मिलनी थी साफ-सुथरी सड़कें, लेकिन मिला वही रोज का नज़ारा – गंदगी के ढेर, बजबजाते नाले और ढीली-ढाली व्यवस्थाएं।
अब सवाल यह है कि इसे अधिकारियों की लापरवाही कहा जाए, सफाई कर्मियों की अनुपस्थिति या फिर प्रचार-प्रसार की पूरी नाकामी? जो भी हो, स्वच्छ भारत मिशन का यह कागज़ी रूप लोनी के नागरिकों को हंसा भी रहा है और रुला भी रहा है
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