बोकारो

प्रवासी मज़दूर उमेश महतो का शव पैतृक गाँव जुरामना पहुचते ही मचा कोहराम, गांव में छाया मातम।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

बोकारो। नावाडीह प्रखंड के ऊपरघाट स्थित बरई पंचायत क्षेत्र के जुरामना निवाशी उमेश महतो का शव मुंबई से पैतृक आवास जुरामना गांव पहुँचा तो परिजनों के हृदय विदारक चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। मृतक उमेश महतो का शव जैसे ही उनके घर पहुंचा तो “क्या बूढ़े, क्या नौजवान एका-एक उसके घर के तरफ दौड़ पड़े। उमेश की पत्नी पायल देवी और उनकी माँ मुनिया देवी का रोते-रोते बुरा हाल हो चुका हैं । वे लगातार अचेत हो जा रही हैं जिनको आस-पास के महिलाओं द्वारा सम्भाला जा रहा हैं, लेकिन उनकी पत्नी अपने पति खोने के गम में वह किसी की नही सुन रही हैं,उनके एक ही शब्द सभी को रुला दे रहे हैं कि हम केकर बिगाडले रहनी हा,अब हमनी के केकरा सहारे रहब। उसकी पत्नी और माँ की यह कह कर दहाड़ मार रही थी। पत्नी पायल देवी और माँ मुनिया देवी, पिता नारायण महतो की बिलाप सुन कर उपस्थित लोग भी अपने-अपने आंसू को नही रोक पाए, बता दे की उमेश महतो मुम्बई में एसएन इंजीनियरिंग कंपनी में काम करता था। जिन्हें 31 दिसंबर को कार्य के दौरान विद्युत स्पर्धात से मौत हो गया था। कंपनी के द्वारा मुआवजा नहीं मिलने के कारण शव साथी लोग नहीं उठा रहे थे। सुचना मिलते हीं प्रवासी मजदूरों के हितार्थ काम करने वाले क्षेत्र के समाजसेवी भुनेश्वर कुमार महतो ने मृतक के घर पहुंचकर परिजनों से मिलकर ढाढस बंधाया। वे अपने सहयोगी आदर्श श्रमिक एकता सामाजिक संस्था से संपर्क कर परिजन को उचित मुआवजा दिलाने में सफल रहे। इसके बाद अस्पताल से शव को उठाया गया। बता दे की संस्था के हेमंत महतो अपने सहयोगियों के साथ मुम्बई अस्पताल पहुंचकर कंपनी के सचिन कुमार से वार्ता कर शव को झारखंड भेजा । वार्ता में तत्काल परिजनों के खाते में 3 लाख 21 हजार व बीमा का लाभ साथ ही ईपीएफ से परिजन को पेंशन देने पर सहमती बनी है , उमेश महतो की शव पहुँचते ही स्थानीय विधायक जय राम महतो पहुँचे और परिजनों से मिल ढाढस बंधाया। वही मृतक का परिवार बेहद गरीब है। उमेश महतो अपने पीछे दिव्यांग पिता नारायण महतो, माता मुनिया देवी, पत्नी पायल देवी, पुत्र युवराज 2.5 वर्षीय व धीरज कुमार नौ माह सहित दो भाई को छोड़ गया। वही प्रवासी मजदूरों के हितार्थ मे कार्य कर रहे सह समाजसेवी भुनेश्वर कुमार महातो ने दुख प्रकट करते हुए कहा कि झारखंड के प्रवासी मजदूरों का मौत के मुंह में समा जाने की यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी कई प्रवासी मजदूरों की मौतें देश एवं विदेशों में हो चुकी है. प्रवासी मजदूरों के साथ किसी तरह का हादसा व किसी तरह का समस्या आती है, तो झारखंड के विधायक, सांसद व मंत्री किसी तरह की मदद नहीं करते हैं. मदद के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिया जाता है । राज्य सरकार को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रदान करने चाहिए, ताकि मजदूरों के पलायन और इस तरह ह्दय विदारक घटनाएं रोके जा सके। आदर्श श्रमिक एकता सामाजिक संस्था के सदस्यों ने एक ही स्वर मे बताया कि अपार दुख की इस घड़ी में संस्था पीड़ित परिवार के साथ है. यह संस्था के सभी सदस्य इस परिवार का भाई व बेटा बनकर हरसंभव सहयोग करेंगे. बताया कि यह संस्था लाचार, बेवश और पीड़ित प्रताड़ित परिवारों के सुख दुख का भागीदार बनता है. इससे पूर्व भी कई पीड़ित परिवारों को अपेक्षित सहयोग किया गया है और मौका मिला तो आगे भी करते रहेंगे. इस संबंध में समाजसेवी नागेश्वर सिंह ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, उपायुक्त, सीओ व बीडीओ को ट्वीट कर शव को पैतृक गांव लाने की गुहार लगाता रहा। मुम्बई में वार्ता में संस्था के हेमंत महतो, दौलत महतो, अर्जुन महतो, भीम महतो, लाल यादव सहित कई थे।

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