विद्या भारती, असम के तहत गुवाहाटी में मेधावी छात्रों को सम्मान।
सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में असम के मुख्य सचिव रवि कोटा उपस्थित।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम : विद्या भारती के अधीनस्थ शिशु शिक्षा समिति, असम के तहत गुवाहाटी के प्रागज्योतिषपुर विश्वविद्यालय के प्रेक्षागृह में गुरुवार को एक गरिमापूर्ण सम्मान समारोह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस समारोह में समिति के अधीन 527 शंकरदेव शिशु निकेतनों के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। सुबह 10:30 बजे दीप प्रज्ज्वलन और सरस्वती वंदना से आरंभ हुए सत्र का उद्घाटन भाषण शिशु शिक्षा समिति असम के महासंघाध्यक्ष जगन्नाथ राजवंशी ने दिया। समारोह में पटासचकुचि के शंकरदेव शिशु निकेतन के मेधावी छात्र ज्योतिर्मय दास ने हाईस्कूल शिक्षाअंत परीक्षा (HSLC) में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर 98.5 प्रतिशत अंक हासिल करने पर विशेष सम्मान प्राप्त किया। इसके साथ ही 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अन्य मेधावी छात्र—तन्मय बरा (97.33%), निकिता देवी (95.83%), कौशिक सेनापति (96.33%), पार्थप्रतिम लहकर (95%), अम्लान भुइंया (95.33%), तनुस्का पराशर (95.34%) और कृष्णाक्षी कलिता (95.67%)—को भी सम्मानित किया गया।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित असम सरकार के मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा ने छात्रों को संबोधित करते हुए दृढ़ संकल्प, अनुशासन और लक्ष्य-निष्ठा का महत्व बताया। उन्होंने मेधावी छात्रों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए समाज के उत्थान में अग्रणी बनने का आह्वान किया। समारोह में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने भी विद्या भारती के शैक्षिक योगदान और छात्रों के सर्वांगीण विकास के प्रयासों की उच्च प्रशंसा की। इसके अलावा, सम्माननीय अतिथि के रूप में शंकरदेव शिक्षा एवं अनुसंधान प्रतिष्ठान के अध्यक्ष अवकाश प्राप्त लेफ्टिनेंट राणा प्रताप कलिता और प्रागज्योतिषपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. स्मृति कुमार सिन्हा ने अपने विचार व्यक्त किए। साथ ही विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र के संगठनिक महासचिव डॉ. पवन तिवारी, महासचिव जगदींद्र रायचौधुरी और शिशु शिक्षा समिति असम के अध्यक्ष कुलेंद्र कुमार भगवती उपस्थित रहे।शिशु शिक्षा समिति असम के प्रचार संयोजक मुकुटेश्वर गोस्वामी के अनुसार, समारोह में पूर्व छात्र भारती की ओर से असमिया, संस्कृत और संगीत विषय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले 51 छात्रों को, पहली बार 100 प्रतिशत उत्तीर्ण होने वाले निकेतनों के प्रधानाचार्यों को तथा 100 प्रतिशत छात्र-छात्राओं को प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने वाले निकेतनों के प्रधानाचार्यों को सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त पूर्व छात्र भारती के प्रभावी गौरव कलिता ने सभी पूर्व छात्र-छात्राओं को भावनाओं के साथ एकत्रित होकर अपनी मातृभाषा सहित भारतीय ज्ञान, परंपरा और संस्कृति के आधार पर मातृभूमि को आगे ले जाने का आह्वान किया।



