झुंझुनू

संविधान दिवस पर स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान निर्माताओं को किया नमन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
झुंझुनूं सूरजगढ़। संविधान दिवस पर काजड़ा में राष्ट्रीय सरपंच संघ की उपाध्यक्ष मंजू तंवर की अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन किया गया। बैठक में सर्वप्रथम देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों व शहीदों और राष्ट्र निर्माताओं को नमन किया। कार्यक्रम का संचालन कर रहे शिक्षाविद् व समाजसेवी मनजीत सिंह तंवर ने कहा- भारत का संविधान हमारा स्वाभिमान और देश का सर्वोच्च विधान है, जो संविधान सभा के विद्वान सदस्यों द्वारा 26 नवंबर 1949 को पारित किया गया था, तथा 26 जनवरी 1950 से प्रभावी हुआ। भारत का हस्तलिखित संविधान विश्व के किसी भी गणतांत्रिक देश का सबसे लंबा लिखित संविधान है। भारतीय संविधान की मूल प्रतियां टाइप या मुद्रित नहीं थीं। वे हस्तलिखित हैं और आज भी संसद भवन की लाइब्रेरी में सुरक्षित हैं। आदर्श समाज समिति इंडिया के अध्यक्ष धर्मपाल गांधी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा- भारत के संविधान का निर्माण 1946 से 1949 के बीच हुआ था। लेकिन संविधान लिखे जाने से पहले हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अदम्य साहस, संघर्ष, त्याग और बलिदान की कहानी खून से लिखी थी। स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की बदौलत ही हम संविधान लिखने की स्थिति में आये थे। संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव कैबिनेट मिशन के तहत जुलाई 1946 में हुआ था। 2 सितंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। उस समय अविभाजित भारत में संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या 389 थी। भारत विभाजन के बाद संविधान सभा के सदस्यों की संख्या 299 रह गई। संविधान सभा का गठन 6 दिसंबर 1946 को हुआ था और संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई थी, जिसमें डॉ. सच्चिदानंद को अस्थायी अध्यक्ष चुना गया। 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष चुने गये। 13 दिसंबर 1946 को पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस प्रस्ताव को संविधान सभा द्वारा 22 जनवरी 1947 को सर्वसम्मति से अपनाया गया। इसी उद्देश्य प्रस्ताव पर भारतीय संविधान का निर्माण किया गया। भारतीय संविधान निर्माण, स्वतंत्रता संग्राम के संघर्षों और विभिन्न राजनीतिक प्रक्रियाओं का परिणाम था। यह संविधान भारतीय जनता की इच्छाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है, जो आज भी हमारे लोकतंत्र का आधार है। भारतीय संविधान के निर्माण की मांग का इतिहास भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में गहराई से जुड़ा हुआ है। भारतीय संविधान निर्माण की प्रक्रिया एक ऐतिहासिक और जटिल प्रक्रिया थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये और कई महत्वपूर्ण व्यक्तियों की भागीदारी रही। संविधान निर्माण के लिए कई समितियों का गठन किया गया। प्रारूप समिति का अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर को बनाया गया। संविधान सभा में 15 महिलाएं भी शामिल थीं, उनका भी संविधान निर्माण में विशेष योगदान रहा है। स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा के सदस्य ही लोकसभा के सदस्य के रूप में कार्य कर रहे थे। जब संविधान निर्माण का कार्य किया जाता था तो इसकी अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद करते थे और जब संसद में विधायिका के रूप में कार्य किया जाता था तो इसकी अध्यक्षता गणेश वासुदेव मावलंकर करते थे। संविधान सभा की अंतिम बैठक 24 नवम्बर 1949 को आयोजित की गई। इस दिन संविधान सभा के 284 सदस्यों ने संविधान पर हस्ताक्षर किये। हस्ताक्षर करने वाले पहले व्यक्ति पंडित जवाहरलाल नेहरू थे। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू किया गया और डॉ. राजेंद्र प्रसाद देश के प्रथम राष्ट्रपति बने। कार्यक्रम की अध्यक्ष मंजू तंवर ने कहा- संविधान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित कर संविधान निर्माताओं को याद करना और देशवासियों को जागरूक करना बहुत जरूरी है। भारत का संविधान हमारा स्वाभिमान और आत्म सम्मान है, जिस पर हम स्वतंत्रता के साथ गर्व करते हैं। भारतीय संविधान असंख्य विविधताओं को अपनी आत्मा में समेटे हुए है। हमारा संविधान न्याय, स्वतंत्रता और समानता का प्रतीक है और यही हमारे लोकतंत्र की पहचान है। इस अवसर पर काजड़ा ग्राम पंचायत प्रशासक राकेश कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता मनजीत सिंह तंवर, शिक्षाविद् जगदीश प्रसाद सैन, राय सिंह शेखावत, होशियार सिंह सिंगाठिया, अनिल जांगिड़, सुरेश शेखावत, रामप्रताप कटारिया, अवनीश पाठक, सुमन मेघवाल, पूजा स्वामी, सरजीत कुमावत, विद्याधर पूनिया, अक्षय शर्मा, अशोक कुमावत, कपिल गुर्जर आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर मंजू तंवर ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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