जाति-धर्म की आग बुझाने और देश को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना लेकर निकले शिक्षक से समाजसेवी बने जितेन्द्र तोमर

गौमुख धाम से पुरा महादेव तक की पदयात्रा पूरी कर घर लौटे – 62 वर्ष की उम्र में भी बिना थके, बिना रुके, लगातार 2008 से निभा रहे आस्था का संकल्प
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बागपत। सेवानिवृत्त शिक्षक, समाजसेवी और सामाजिक समरसता के प्रबल पक्षधर जितेन्द्र तोमर (उम्र 62 वर्ष) ने इस वर्ष भी अपनी परंपरागत गौमुख धाम से पुरा महादेव मंदिर, बागपत तक की कांवड़ पदयात्रा पूरी कर ली है।
लेकिन इस बार उनकी यात्रा का भाव कुछ विशेष था — न किसी मनोकामना की पूर्ति हेतु, न किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए, बल्कि देश के वर्तमान सामाजिक हालात को लेकर गहरी चिंताओं और मंगलकामनाओं से भरी यह यात्रा सिर्फ भोलेनाथ से “सद्बुद्धि की याचना” थी।
जातीय और सांप्रदायिक ज्वालाओं को शीतल करने की कामना
जितेन्द्र तोमर का मानना है कि आज देश में जिस तरह से जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पर वैमनस्य और उन्माद फैलाया जा रहा है, वह चिंताजनक है।
उन्होंने भोलेनाथ से प्रार्थना की —
“हे भोलेनाथ! इस देश को फिर से एकता, भाईचारे और शांति की राह पर ले चलो।”
उनकी यात्रा राजनेताओं की ओर से आए दिन की जा रही भड़काऊ बयानबाज़ी को रोकने, और जनता को जाति-मजहब के जाल से बाहर निकालकर एक दूसरे को अपना मानने की सद्बुद्धि देने के उद्देश्य से की गई थी।
बिना किसी कष्ट के पूरी हुई यात्रा, यही रही हर बार की तरह विशेषता
जितेन्द्र तोमर वर्ष 2008 से हर वर्ष यह पदयात्रा कर रहे हैं।
केवल कोरोना काल और उत्तराखंड आपदा के समय यात्रा स्थगित हुई थी।
हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने न कोई व्रत रखा, न कोई स्वार्थ, बस एक भाव लिए चले – “समाज जागे, देश जिए।”
उनकी सभी यात्राएं अब तक बिना किसी शारीरिक या मानसिक कष्ट के संपन्न हुई हैं — यह भी भोलेनाथ की कृपा और उनके भीतर बसे तपस्वी भाव की साक्षात अनुभूति है।
घर वापसी के साथ दिया संदेश
यात्रा पूर्ण कर वे आज सकुशल घर लौट आए। उन्होंने सभी देशवासियों से आह्वान किया:
“धर्म, जाति और मजहब के नाम पर लड़ना बंद करें। असली देशभक्ति वही है जिसमें हम एक-दूसरे को गले लगाएं, न कि दीवारें खड़ी करें।”



