राजस्व उप निरीक्षकों के चलते बदनाम होते हैं अंचल अधिकारी, दाखिल – खारिज हेतु पहले से की गयी आवेदन का नहीं होता है म्यूटेशन, पीछे यानी बाद वाले आवेदन का हो जाता है म्यूटेशन , कहीं चढ़ावा का इश्यू तो नहीं?
Zonal officers get defamed due to the revenue sub-inspectors, the application made earlier for mutation is not mutated, the application made later i.e. later is mutated, is there an issue of bribe?

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ अंचल कार्यालय में गजब का स्थिति बनी हुई है। आम जनों के द्वारा म्यूटेशन के लिए आवेदन की तो जा रही है। लेकिन कहीं ना कहीं यहां चढ़ावा का दस्तक दी जा रही है जैसा हालात महसूस की जा रही है। आम जनों के द्वारा म्यूटेशन के लिए आवेदन की जा रही है, लेकिन पहले से आवेदन की गई आवेदक का निष्पादन ना होकर उसके बाद वाला आवेदनों का निष्पादन हो जा रहा है, जिससे कहीं ना कहीं सवालिया निशान उभरकर आ रहा है। खासकर नये निबंधन केवाला/ डीड का म्यूटेशन आवेदन संख्या के अनुरूप परस्पर होना स्वाभाविक है, परन्तु बहुत सारे आवेदनों का समयावधि में न होकर कभी कभी टाल-मटोल कर रिजेक्ट की पंक्ति में भेज देने जैसे गंभीर हालत का सामना आम-जनों को करना पड़ रहा है। फिलहाल जो रजिस्ट्री होता है, वह कम्पलिट दस्तावेज प्रस्तुत करने के पश्चात ही होता है, और म्यूटेशन के लिए ऑनलाइन अप्लाई भी हो जाता है। लेकिन राजस्व उप निरीक्षकों की लापरवाही के कारण उनमें से भी बहुत सारे निबंधन केवाला यानी डीड का म्यूटेशन/ आवेदन रिजेक्ट की श्रेणी में चला जाता है। यदि दोबारा उक्त डीड को ऑनलाइन अप्लाई किया जाता है तो भी कभी-कभी उन में से कई आवेदन ( म्यूटेशन) रिजेक्ट की पंक्ति में स्थिर होने में मजबूर है जो राजस्व उपनिरीक्षकों की कार्यशैली पर सवालिया सुराते हाल स्पष्ट झलकता हुआ महसूस की जा रही है। आम-जनों के द्वारा साझा की गई दाखिल – खारिज / म्यूटेशन के लिए आवेदन संख्या – 7072, 7073, 7074 व 7080 जो पहले ऑनलाइन आवेदन/ अपलोड किया गया वह अभी भी पेंडिंग है। परंतु बाद में जो म्यूटेशन के लिए अप्लाई किया गया ( दाखिल खारिज हेतु आवेदित संख्या – 7476, 7475, 7566, 7642, 7372 समेत 7382 अन्य) वह हो गया। और पहले जो अप्लाई हुआ वह नहीं हुआ। जो स्पष्ट रूप से राजस्व उपनिरीक्षकों की कार्यशैली की बास्स्तविकता उभर कर सामने आ रही है। जो स्पष्ट रूप से चढ़ावा का कहीं ना कहीं खुशबू प्रकट होता हुआ महसूस की जा रही है। उल्लेखनीय आवेदनों का सर्च करने पर पता चला जो जो 2 महीना पहले आवेदन हुआ उसका म्यूटेशन नहीं हुआ और जो नया उसके बाद में अप्लाई किया गया, उसका 15 दिन में हो गया । जो अप्रयोजनीय प्रश्न चिन्ह कागज के पन्नों पर उभर कर अपने आप आ रहा है। आलम यह होता है कि राजस्व उपनिरीक्षकों की कार्यशैली के बादौलत अंचल अधिकारी बदनाम होते हैं, जिसे अंचल अधिकारी को संज्ञान में लेने की आवश्यकता है। ताकि ऐसी सिचुएशन उभरकर ना आये और आमजन परेशानी से बच्चे।



