झांसी
हर दौर में प्रासंगिक रहेंगे लोकगीत: मालिनी अवस्थी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
झांसी : बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर विविध आयोजन हुए । जिसमें एक शाम पद्मश्री मालिनी अवस्थी के नाम , नए परिचर्चा में भाग लिया। जिसमें लोक कला, लोक संगीत, लोक परंपरा पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि डिजिटल दौर में भी लोकगीत हमेशा प्रासंगिक रहेंगे । उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में लोकगीत को शामिल करने की जरूरत बताई । कहा कि इसके माध्यम से लोक कला , विद्यार्थियों एवं युवाओं के बीच पहुंच बन सकेगा । कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडे ने लोकगीतों को जन-जन तक पहुंचने में उनके योगदान की सराहना की । मंच पर मालिनी अवस्थी से वार्ता शोधार्थी शाश्वत सिंह ने की ।
सास बहू के रिश्ते पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा सांस के रिश्ते को हमेशा नकारात्मक रूप से देखा जाता है जबकि मेरा मानना है सास को गुरु के रूप में लिया जाना चाहिए। सास शासित होती है घर को जोड़ने वाली होती है बिना कठोर अनुशासन के परिवार नहीं चलता है सुखी जीवन का यही मूल मंत्र है सास की डांट को कभी मन में नहीं रखना चाहिए । उन्होंने बहू को सलाह दी सास एवं पति को जीतने की कोशिश नहीं करना चाहिए ।इनको मन से जीतना चाहिए । उन्होंने कहा कि नृत्य मनोरंजन की कला नहीं सभ्यता है लोक संगीत के बदलते स्वरूप की तुलना नदी से की है नदी में बाढ़ भी आती है और सुख भी आती है और बाढ़ में कूड़ा कचरा किनारे छोड़ दिया जाता है इसी तरह लोग संगीत हमेशा बुराइयों को छोड़कर आगे बढ़ता रहेगा । सभागार में संकाय सदस्य एवं शोधार्थी हिंदी विभाग के छात्राएं उपस्थित रहे । स्मृति चिन्ह देकर उन्हें सम्मानित किया गया । अंत में डॉ मुन्ना तिवारी ने आभार व्यक्त किया ।


