कर्म से पहले विचार करें, तभी मिलेगा शांति का मार्ग: आचार्य श्री नयन सागर मुनिराज ने
नगर के कौशल भवन सभागार में आयोजित धर्मसभा में दिया प्रेरणादायक संदेश

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बड़ौत/बागपत : नगर के कौशल भवन सभागार में आयोजित धर्मसभा में परम पूज्य आचार्य श्री 108 नयन सागर मुनिराज ने धर्म, संयम और कर्म के विषय में सारगर्भित प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि –
“मनुष्य जब कर्म करता है, तो उस समय विचार नहीं करता, परंतु जब उस कर्म का फल सामने आता है, तब पछताता है। किंतु तब केवल पछतावे से कुछ नहीं बदलता। इसलिए आवश्यक है कि हर कार्य को करने से पहले गहराई से विचार करें।”
उन्होंने कहा कि पारसनाथ भगवान जैसे तीर्थंकरों को भी उपसर्ग सहन करने पड़े, तो हम सामान्य मनुष्य कैसे अपवाद हो सकते हैं? इसलिए हर कर्म से पूर्व विवेक और संयम आवश्यक है।
“बुरे कर्मों का त्याग और अच्छे कर्मों का चुनाव ही जीवन को सफल बनाता है। धर्म, अहिंसा और क्षमा ही वास्तविक जीवन मूल्यों की पहचान हैं।”
धर्मसभा में दिगंबर जैन समाज समिति के अनेक पदाधिकारी और समाज के गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से समिति अध्यक्ष प्रवीण जैन, मंत्री मनोज जैन, दिनेश कुमार जैन, मनोज जैन पंसारी, धनपाल जैन (बंदूक वाले), राजेश जैन (हरकुलिस), अनुराग मोहन जैन, सतीश जैन (लकड़ी वाले), पवन जैन (स्वदेशी), राकेश जैन, अशोक जैन (दवाई वाले) सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे।
सभा के अंत में सभी श्रद्धालुओं ने आचार्य श्री के चरणों में वंदन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्मसभा का आयोजन अत्यंत शांतिपूर्ण और श्रद्धामय वातावरण में संपन्न हुआ।


