गाजियाबाद

जल संकट की आहट से चिंतित गंगा एन्क्लेव के लोग 

हजारों लीटर पानी की अवैध सप्लाई से गिर रहा है कालोनी का जलस्तर 

 नियमों को धता बताते हुए  धड़ल्ले से चल रहा है पानी प्लांट 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

लोनी (गाजियाबाद): कविता सिनेमा हाल के पीछे गंगा एन्क्लेव कॉलोनी में चल रहा एक पानी प्लांट स्थानीय निवासियों के लिए सिरदर्द बन गया है। कॉलोनीवासियों का कहना है कि प्लांट से प्रतिदिन हजारों लीटर पानी की सप्लाई लोनी बॉर्डर की आधा दर्जन कालोनियों में ट्रॉली, व्हीलर और रेहड़ियों के माध्यम से की जा रही है। इस अत्यधिक दोहन के चलते क्षेत्र में पानी का जलस्तर लगातार गिर रहा है, जिसके कारण कालोनी के घरों में लगे हैंडपंप ठप पड़ गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पानी प्लांट रिहायशी इलाके में नियमों की अनदेखी कर चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निकाय, और खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से अनुमति लिए बिना ही यह प्लांट संचालित है। इसके अलावा, कंट्रोल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी से भी अनुमति लेना आवश्यक है, लेकिन यहां ऐसा कोई लाइसेंस नहीं लिया गया है।
जानकारों के अनुसार, किसी भी पानी प्लांट को शुरू करने से पहले सीटीई (Consent to Establish) और सीटीओ (Consent to Operate) की अनुमति जरूरी होती है, साथ ही बिना बीआईएस (BIS) मार्क के पानी की बिक्री पूरी तरह अवैध मानी जाती है।
कॉलोनीवासियों ने यह भी बताया कि प्लांट परिसर में साफ-सफाई, उचित वेंटिलेशन और हाइजीनिक व्यवस्था का पूरी तरह अभाव है। बोतलिंग यूनिट में स्टेनलेस स्टील टैंक और उचित फिल्टरेशन सिस्टम तक नहीं हैं। इन सबके बावजूद, संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई बार पुलिस प्रशासन, नगर पालिका और भूगर्भ विभाग से इसकी शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कार्यवाही के नाम पर केवल आश्वासन ही मिला है। लोगों का आरोप है कि प्लांट संचालक सहायता राशि और प्रभावशाली संपर्कों के बलबूते पर इस अवैध कारोबार को खुलेआम चला रहा है।
गंगा एन्क्लेव कॉलोनी के निवासियों में अब भविष्य में पानी की किल्लत को लेकर गहरी चिंता है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द कार्यवाही नहीं की, तो आने वाले समय में क्षेत्र में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
स्थानीय निवासियों की मांग है कि प्रशासन तत्काल इस अवैध पानी प्लांट को बंद कराते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करे, ताकि रिहायशी इलाकों में जल संकट की समस्या को समय रहते रोका जा सके।
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