सिंगरौली
एनसीएल गोरबी ब्लॉक-बी में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल
विस्थापितों ने लगाया बिचौलियों के जरिए नियुक्तियों का आरोप

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के गोरबी ब्लॉक-बी अंतर्गत कार्यरत अजंता राधा कंपनी में भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि भर्तियों में पारदर्शिता नहीं बरती गई और बिचौलियों के माध्यम से मनमाने ढंग से नियुक्तियां की गईं।
विस्थापितों का कहना है कि भर्ती में अनियमितताओं के चलते क्षेत्र में बार-बार विरोध प्रदर्शन और माइंस बंद होने जैसी स्थिति बनी, जिससे एनसीएल प्रबंधन को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इसी पृष्ठभूमि में विरोध और असंतोष को समाप्त करने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देश पर आठ गांवों के विस्थापितों और प्रभावितों के लिए एक रोजगार शिविर आयोजित कराया गया था।
बताया गया कि उक्त रोजगार शिविर में पात्र एनसीएल प्रबंधन को सौंपी गई थी, लेकिन अभ्यर्थियों के चयन की जिम्मेदारी विस्थापितों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में भी बिचौलियों की सक्रिय भूमिका रही और तय मानकों की अनदेखी कर भर्तियाँ कर दी गई।
शर्तों को दरकिनार कर की गई भर्तियां
विस्थापितों के अनुसार, पहले चरण में अजंता राधा कंपनी द्वारा भर्ती की अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें भूमि विवरण, समग्र आईडी, आधार कार्ड सहित आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे। इसके बावजूद आरोप है कि इन शर्तों को नजरअंदाज कर मनमानी तरीके से नियुक्तियां कर दी गई।
बाहरी लोगों को नौकरी देने का आरोप
विस्थापितों का यह भी आरोप है कि कलेक्टर के आदेशों में विस्थापित और प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी, लेकिन इसके विपरीत अन्य कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और बिहार के बाहरी लोगों को नौकरी दे दी गई। इससे स्थानीय युवाओं और विस्थापित परिवारों में भारी आक्रोश है।
आंदोलन के नाम पर भी बिचौलिए सक्रिय
विस्थापितों का आरोप है कि आंदोलन के नाम पर भी कई बिचौलिए सक्रिय रहे। उन्होंने भीड़ इकट्ठा कर लोगों को गुमराह
किया और बाद में कथित रूप से पैसे लेकर मनमानी भर्तियों के बाद आंदोलन से अलग हो गए। इससे विस्थापितों का विश्वास और अधिक टूटा है।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
मामले को लेकर विस्थापितों ने जिला कलेक्टर से आग्रह किया है कि एनसीएल प्रबंधन से वास्तविक विस्थापितों की सूची निकलवाकर उसी के आधार पर भर्ती कराई जाए तथा कथित मनमानी भर्तियों को निरस्त किया जाए। विस्थापितों ने चेतावनी दी है कि यदि एनसीएल प्रबंधन और अजंता राधा कंपनी द्वारा उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो वे पुनः बड़े आंदोलन की राह अपनाने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रबंधन की होगी।
330 के बजाय 500 से अधिक भर्तियों का आरोप
जानकारी के मुताबिक, जहां आधिकारिक रूप से 330 भर्तियों की सूची जारी की गई थी, वहीं इसके अतिरिक्त 500 से अधिक लोगों की भर्ती किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। इन अतिरिक्त भर्तियों का आधार क्या रहा, इस संबंध में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।



