जालौन
नाली के नाम पर खुदाई, निर्माण गायब ग्रामीणों ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
समाधान दिवस में पहुंची शिकायत मकानों के सामने महीनों से खुली पड़ी नाली

पानी भरने से बढ़ा खतरा ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने दिए जांच के निर्देश
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जालौन (उरई)। विकासखंड क्षेत्र के ग्राम वीरपुरा में नाली निर्माण कार्य को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि नाली निर्माण के नाम पर लाखों रुपये की सामग्री मंगाकर खुदाई तो करा दी गई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। इससे जहां ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हो रहा है, वहीं मकानों को भी नुकसान पहुंचने का खतरा मंडरा रहा है।
मामला इतना बढ़ गया कि पीड़ित ग्रामीण तहसील संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचे और अधिकारियों को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार गांव में सैयद बाबा के चबूतरे से खचेरे पासवान के मकान तक नाली निर्माण का कार्य स्वीकृत हुआ था। इसके लिए गुम्मा, गिट्टी, बालू और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री भी मौके पर पहुंचाई गई थी तथा नाली की खुदाई भी करा दी गई थी। लेकिन कुछ समय बाद निर्माण सामग्री को हटा लिया गया और निर्माण कार्य बीच में ही छोड़ दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि अधूरी नाली अब उनके लिए मुसीबत बन गई है। मकानों के सामने गहरी खुदाई होने के कारण नाली में पानी जमा रहता है, जिससे घरों में सीलन बढ़ रही है और भवनों की नींव कमजोर होने की आशंका बनी हुई है। वहीं छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को रास्ते से निकलने में रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित ग्रामीण भूप सिंह ने बताया कि उनके मकान के सामने गहरी नाली खोद दी गई, लेकिन आज तक उसका निर्माण नहीं कराया गया। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य अधूरा छोड़ने के पीछे वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। तहसील संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत मिलने पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रिंकू सिंह राही ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने और नाली निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कराने का आश्वासन दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह उच्च अधिकारियों से शिकायत कर आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे। अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर अधूरी पड़ी नाली का निर्माण कब पूरा होगा और ग्रामीणों को राहत कब मिलेगी।


