ललितपुर
मछुआरों का नाम ओबीसी से खारिज करे सरकार : महेश कश्यप
अनुसूचित में गणना करने का आदेश जारी हो, मझवार, तुरैहा का सर्टिफिकेट जारी हो
मझवार-तुरेहा को अनुसूचित जाति का लाभ दिलाने की मांग तेज
निषाद पार्टी ने विधायक के माध्यम से विधानसभा में मुद्दा उठाने की अपील की
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। मझवार, तुरेहा सहित कई घुमंतू एवं वंचित जातियों को अनुसूचित जाति का संवैधानिक लाभ दिलाने की मांग को लेकर निषाद पार्टी ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय कुमार निषाद ने विधायक को पत्र भेजकर आग्रह किया है कि इस गंभीर सामाजिक मुद्दे को उत्तर प्रदेश विधानसभा में लोक महत्व के विषय के रूप में उठाया जाए।
पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश शासन के कार्मिक अनुभाग-2 द्वारा 31 दिसंबर 2016 को जारी अधिसूचना तथा भारत सरकार के गृह मंत्रालय की 8 जनवरी 2022 की अधिसूचना के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनपद और तहसील स्तर पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसके चलते मझवार, तुरेहा, निषाद, केवट, मल्लाह, कहार, धीमर, बिंद, बाथम, गोंडिया, मांझी, मझुआ आदि जातियों को आज भी पिछड़ी जाति का प्रमाण-पत्र जारी किया जा रहा है, जो नियमविरुद्ध और असंवैधानिक बताया गया है।
अनुसूचित जाति सूची से हटाए जाने के बावजूद जारी हो रहे गलत प्रमाण-पत्र
निषाद पार्टी का आरोप है कि राज्यपाल द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत 31.12.2016 को जारी अधिसूचना में उपरोक्त जातियों को पिछड़ी जाति की सूची से हटाकर अनुसूचित जाति में सम्मिलित किया गया था। इसके बाद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा पुराने नियमों के आधार पर प्रमाण-पत्र जारी किए जा रहे हैं, जो भारत के संविधान और केंद्र सरकार के आदेशों का खुला उल्लंघन है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1950 की राष्ट्रपति अधिसूचना, 1961 की जनगणना, 1977 के संशोधन और विभिन्न संवैधानिक प्रावधानों में मझवार व तुरेहा जातियों को अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता दी गई है। कई अन्य राज्यों जैसे दिल्ली, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड में भी ये जातियां अनुसूचित जाति की श्रेणी में आती हैं।
पांच सूत्री मांगें रखीं
निषाद पार्टी ने विधायक से आग्रह किया है कि विधानसभा में यह मांग उठाई जाए कि मझवार जाति की संवैधानिक रूप से अनुसूचित जाति में जनगणना कराई जाए। मझवार एवं तुरेहा जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र जारी किया जाए। 31 दिसंबर 2016 की अधिसूचना के आधार पर मझवार को ओबीसी सूची से हटाया जाए।
नई संशोधित अनुसूचित जाति सूची जारी की जाए। निषाद, केवट, मल्लाह, कहार, धीमर, बिंद, बाथम, तुरेहा, गोंडिया, मांझी, मझुआ आदि जातियों को अनुसूचित जाति की समस्त सुविधाएं प्रदान की जाएं।
सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर मुद्दा
डा.संजय निषाद ने कहा कि यदि समय रहते इस विसंगति को दूर नहीं किया गया तो लाखों वंचित परिवार शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाएंगे। यह केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा गंभीर विषय है। निषाद पार्टी ने उम्मीद जताई है कि विधायक इस विषय को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा में उठाएंगे और सरकार को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप निर्णय लेने के लिए बाध्य करेंगे। इसे लेकर ललितपुर से जिलाध्यक्ष महेश रायकवार (हरपुरा) ने भी समर्थन करते हुए जल्द कार्यवाही की मांग की।
ज्ञापन पर इनके हैं हस्ताक्षर
ललितपुर जिलाध्यक्ष महेश कश्यप हरपुरा के साथ ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में हरगोविन्द रायकवार, सुरेन्द्र कुमार, अमन रैकवार, दीपक, पीयूष रैकवार, महेश, रवि कुमार निषाद, अजय कुमार, जानकी माते, हरीशंकर, दिनेश, जगभान, रम्मू, मुकेश रायकवार, अमित कश्यप, सुकलाल माते, शिवराज, जानकी प्रसाद, महेन्द्र रैकवार, संजय रैकवार, राजू रैकवार, राजकुमार, दिनेश रैकवार, गोलू रैकवार, आनन्द रैकवार, जितेन्द्र रायकवार, बृजेश रैकवार, राकेश रैकवार, निरमल रैकवार, पंकज रैकवार, अरविन्द, नरेन्द्र, विनोद कुमार, खेमचंद्र के अलावा अनेकों लोग मौजूद रहे।



