
लखनऊ। भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) ने मंगलवार को लखनऊ के शक्ति भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में 15 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग प्रमुख रही। सैकड़ों किसान ट्रैक्टरों के साथ शक्ति भवन पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने बिजली विभाग के प्रबंध निदेशक (एमडी) के साथ तत्काल वार्ता की मांग की, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।
भाकियू भानु गुट के नेताओं ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण किसानों को सिंचाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इससे फसलों को नुकसान हो रहा है, जिसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ रहा है। एक प्रदर्शनकारी किसान, रामपाल सिंह, ने कहा, “बिना बिजली के खेती असंभव है। हमारी फसलें सूख रही हैं, और सरकार हमारी बात सुनने को तैयार नहीं।” गुट के प्रवक्ता ने आधिकारिक बयान में कहा, “जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में 15 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाती और हमारी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती, हम धरना समाप्त नहीं करेंगे।” प्रदर्शन के दौरान किसानों ने बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों का एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपने की कोशिश की। धरने को देखते हुए लखनऊ पुलिस ने शक्ति भवन के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। भारी पुलिस बल और बैरिकेड्स तैनात किए गए ताकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और सुनिश्चित करेंगे कि कानून-व्यवस्था बनी रहे।” हालांकि, 9 सितंबर की शाम तक बिजली विभाग या उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। भाकियू भानु गुट लंबे समय से किसानों के हितों के लिए आंदोलन करता रहा है। इससे पहले, गुट ने भूमि पैमाइश, फसल मुआवजा, और खाद की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन किए हैं। जून 2025 में एटा में भूमि पैमाइश के मुद्दे पर भी गुट ने धरने की चेतावनी दी थी। वर्तमान प्रदर्शन ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की कमी और किसानों की बदहाल स्थिति को उजागर करता है।





