राजस्थान

हिजाब पहनकर मरीज देखना मैं अलाउ नहीं करूँगी

जनाना अस्पताल में हिजाब विवाद ; विडियो हो रहा वायरल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
राजस्थान के टोंक जिले के जनाना अस्पताल में हिजाब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक लेडी डॉक्टर और इंटर्न कर रही छात्रा के बीच हिजाब पहनने को लेकर बहस होती नजर आ रही है। यह वीडियो सामने आने के बाद जिले में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। मुस्लिम संगठनों ने इस मामले पर नाराज़गी जताते हुए पीएमओ तक शिकायत भेज दी है।

2 मिनट 21 सेकंड का वीडियो, दोनों के बीच नोकझोंक

वायरल हो रहे इस वीडियो की लंबाई करीब 2 मिनट 21 सेकंड बताई जा रही है। इसमें साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल में ड्यूटी कर रही एक इंटर्न छात्रा और महिला डॉक्टर के बीच हिजाब को लेकर नोकझोंक हो रही है। लेडी डॉक्टर का साफ कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर स्टाफ का चेहरा दिखना ज़रूरी है, ताकि मरीजों को यह पता रहे कि उन्हें दवा, इंजेक्शन या ड्रिप किसने दी है। उनका कहना था कि चेहरा ढका होने से पारदर्शिता और पहचान में दिक़्क़त आती है।

वहीं, छात्रा इस बात पर सहमत नहीं हुई। उसने डॉक्टर को जवाब देते हुए कहा कि वह अस्पताल में ड्यूटी करते समय हिजाब उतारकर काम नहीं करेगी। छात्रा का कहना था कि उसके पास पहचान पत्र मौजूद है और जरूरत पड़ने पर वह चेहरा दिखा सकती है, लेकिन हिजाब उतारना उसके लिए संभव नहीं है।

महिला डॉक्टर का पक्ष

विवाद में घिरी महिला चिकित्सक ने सफाई देते हुए कहा कि उनकी मंशा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। उन्होंने केवल इतना कहा था कि मरीजों की सुविधा और पहचान के लिए ड्यूटी के दौरान चेहरा खुला रहना चाहिए। उनका कहना था कि अन्य इंटर्न छात्राएं हिजाब पहनकर ड्यूटी नहीं करतीं और इस छात्रा को भी उसी नियम का पालन करना चाहिए। डॉक्टर का कहना है कि अस्पताल में इलाज लेने आने वाले मरीजों को स्पष्ट रूप से यह दिखना चाहिए कि उनका इलाज कौन कर रहा है।

छात्रा का तर्क

इंटर्न छात्रा ने इस पूरे मामले में अपने पक्ष को रखते हुए कहा कि वह हिजाब पहनना जारी रखेगी। उसने दो टूक कहा कि पहचान पत्र उसके पास है और वह जब भी आवश्यक होगा चेहरा दिखा सकती है। लेकिन ड्यूटी करते समय हिजाब उतारना उसके लिए स्वीकार्य नहीं है।

मुस्लिम संगठनों का विरोध

वीडियो वायरल होने के बाद मुस्लिम संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है। उनका कहना है कि छात्रा को हिजाब पहनने से रोकना उसकी धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। संगठनों ने इस मामले की शिकायत पीएमओ तक भेजी है और महिला चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि किसी भी छात्रा या कर्मचारी को धार्मिक परंपरा निभाने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

हालांकि इस विवाद को लेकर अब तक पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

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