
जयपुर/नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल चंबल अभयारण्य की 732 हेक्टेयर जमीन के डी-नोटिफिकेशन (अधिसूचना रद्द करने) पर रोक लगाते हुए राजस्थान सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने अवैध खनन पर चिंता जताई और संबंधित राज्यों व केंद्र से जवाब मांगा, अगली सुनवाई 11 मई को होगी।
नई दिल्ली में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार द्वारा नेशनल चंबल अभयारण्य की 732 हेक्टेयर जमीन को डी-नोटिफाई (अधिसूचना रद्द) करने के फैसले पर रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि संरक्षित प्रजातियों के लिए आरक्षित किसी भी भूमि का डी-नोटिफिकेशन स्वीकार नहीं किया जाएगा और राज्य सरकार की कार्रवाई आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं पर खरी नहीं उतरती।
अवैध खनन को लेकर राज्य पर गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान अदालत ने राजस्थान सरकार को अवैध रेत खनन को ह्लसुविधा देनेह्व के लिए कड़ी फटकार लगाई। न्यायालय ने ह्लमाइनिंग माफियाह्व को ह्लडकैतह्व बताते हुए कहा कि राजस्थान में इनके कारण कई एसडीएम, पुलिसकर्मी और वन विभाग के अधिकारियों की जान जा चुकी है। अदालत ने इसे कानून-व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए गंभीर स्थिति बताया।
संवेदनशील पारिस्थितिकी और संकटग्रस्त जीवों पर चिंता-पीठ ने कहा कि घड़ियाल सहित कई जलीय जीव विलुप्ति के कगार पर हैं और चंबल क्षेत्र की पारिस्थितिकी बेहद संवेदनशील है। अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
तीन राज्यों में फैला संरक्षित क्षेत्र-नेशनल चंबल अभयारण्य, जिसे नेशनल चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है, लगभग 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला एक त्रि-राज्यीय संरक्षित क्षेत्र है। यह राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर चंबल नदी के किनारे स्थित है और घड़ियाल, रेड-क्राउन रूफ टर्टल तथा गंगा डॉल्फिन जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों का प्रमुख आवास है।
ईको-सेंसिटिव जोन और प्रक्रियाओं पर सवाल-अदालत की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी ने बताया कि राजस्थान ने अब तक ईको-सेंसिटिव जोन घोषित नहीं किया है और दिसंबर 2025 में 732 हेक्टेयर क्षेत्र को डी-नोटिफाई करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि डी-नोटिफिकेशन के बाद यह जमीन राजस्व भूमि बन जाती है, जिससे संरक्षण प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।
वीडियो और रिपोर्ट्स पर अदालत की चिंता-सुनवाई के दौरान प्रस्तुत वीडियो का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने उन्हें ह्लडरावनाह्व बताया, जिसमें जलीय जीवों के बीच भारी मशीनों से रेत निकासी होती दिखी। अदालत ने कहा कि यह स्थिति दशार्ती है कि अवैध खनन किस स्तर तक फैल चुका है और यह गंभीर चिंता का विषय है।
राज्यों और केंद्र से जवाब तलब-अदालत ने एमिकस क्यूरी और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। साथ ही पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भी इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
अगली सुनवाई 11 मई को-सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार के 23 दिसंबर 2025 के नोटिफिकेशन, जिसे 9 मार्च 2026 को लागू किया गया था, पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है। साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में लंबित मामले को भी सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया गया है।



