जालौन
पड़ौरा में फर्जी भुगतान, धोखाधड़ी में सचिव दोषी, लेकिन कार्यवाही शून्य
उप जिलाधिकारी की जांच आख्या सवालों के घेरे में
एमबी फर्जी तो भुगतान सही कैसे, जांच आख्या में साक्ष्यों का जिक्र नहीं
शिकायत के मुख्य बिंदुओं को अनदेखा किया गया
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
उरई (जालौन)। जनपद की ग्राम पंचायतों सरकारी धन के बंदरबांट और वित्तीय अनियमितता के आंकड़ों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला हैं। क्योंकि जिले में बैठे जिम्मेदारों ने ग्राम सचिवों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दे रखी है। शिकायत होने पर फर्जी जांच आख्या लगाकर फर्जी निस्तारण किया जा रहा है।
मामला विकासखंड कदौरा के ग्राम पंचायत पंडौरा का है। जहां पर शिकायतकर्ता ने सामुदायिक शौचालय में बिना कार्य के भुगतान और फर्जी फोटो अपलोड करने की शिकायत की थी। जिलाधिकारी जालौन राजेश कुमार पाण्डेय ने उपजिलाधिकारी कालपी मनोज कुमार और खंड विकास अधिकारी संदीप मिश्रा की संयुक्त टीम से जांच रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच टीम द्वारा जांच की गई और फोटो फर्जी पाई गई। लेकिन फर्जी फोटो अपलोड करने वाले दोषी सचिव के विरुद्ध आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। वहीं जांच में शिकायतकर्ता को गुमराह भी किया गया है। क्योंकि शिकायत का मुख्य बिंदु फर्जी भुगतान के बारे में कोई भी स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। जांच के मुख्य बिंदुओं को जांच टीम द्वारा जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है और आरोपी सचिव प्रधान को बचाया गया है।
जांच आख्या संदेह के घेरे में एमबी के बिना कैसा भुगतान
शिकायतकर्ता और क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि एसडीएम कालपी मनोज कुमार और खण्ड विकास अधिकारी कदौरा संदीप मिश्रा द्वारा कहीं न कहीं दोषी का बचाव किया गया है। क्योंकि जो फर्जी भुगतान हुआ है बिना एमबी के हुआ है। अगर एमबी हुई ही नहीं है। तो भुगतान कैसा, क्योंकि विकासखंड में तैनात सभी अवर अभियंताओं का कहना है कि मेरे द्वारा इस कार्य की एमबी नहीं बनाई गई हैं। अगर एमबी में किसी के हस्ताक्षर है भी तो वो फर्जी हैं। क्योंकि सभी अवर अभियंताओं ने एमबी बनाने की बात को सिरे से खारिज किया है। जांच अधिकारियों द्वारा फर्जी और दोषपूर्ण जांच आख्या प्रस्तुत की गई हैं।
पारिवारिक रसूख के चलते काले कारनामों पर डाल दिया जाता पर्दा
ग्राम पंचायत पंडौरा में तैनात सचिव के लिए अपनी पंचायतों में भ्रष्टाचार, और दबंगई करना आम बात हो गई है। इससे पहले भी माधौगढ़ में खंड विकास अधिकारी रमेशचंद्र शर्मा के साथ मारपीट करने का मामला सामने आया था। जिसके बाद उक्त सचिव को निलंबित किया गया था। विदित हो कि ग्राम पण्डौरा में इसी मामले के शिकायतकर्ता को फोन पर धमकी देने का ऑडियो भी वायरल हुआ था। जिसमें उक्त सचिव द्वारा अपने पिता का जिक्र करते हुए कहा गया था कि मेरा बाप वकील है। सब देख लेगा और मेरे द्वारा तमाम अपराध किए गए हैं। उसके बाद ग्राम बबीना में महिला पंचायत सहायक के साथ अभद्रता और अश्लीलता, ग्राम पंडोरा में महिला शौचालय केयर टेकर के साथ अभद्रता आए दिन का काम हो गया है। लेकिन जांच अधिकारी खंड विकास अधिकारी कदौरा संदीप मिश्रा और जिला पंचायत राज अधिकारी जालौन राम अयोध्या प्रसाद जानबूझकर ऐसे स्वेच्छाचारी सचिव को विगत कई वर्षों से गृह जनपद यहां तक की गृह नगर में रखने पर आमादा हैं।


