दिल्लीराष्ट्रीय

मार्च 2026 में औद्योगिक उत्पादन 4.1% बढ़ा

विनिर्माण और खनन क्षेत्र से अर्थव्यवस्था को मिली मजबूती

नई दिल्ली । भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि (आईआईपी) ने वित्त वर्ष के अंत में सकारात्मक और स्थिर गति दिखाई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में औद्योगिक उत्पादन 4.1 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। गौरतलब है कि पिछले साल के समान महीने (मार्च 2025) में यह आंकड़ा 3.9 प्रतिशत पर था। सूचकांक में आई यह आंशिक लेकिन महत्वपूर्ण तेजी अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थिर और मजबूत दृष्टिकोण का संकेत देती है।
मैन्युफैक्चरिंग और माइनिंग में तेजी-औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में सबसे अधिक वेटेज रखने वाले मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है। विभिन्न सेक्टर्स के प्रदर्शन से जुड़े मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं: मैन्युफैक्चरिंग: इस सेक्टर में 4.3 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अंतर्गत आने वाले 23 में से 14 उद्योग समूहों ने सकारात्मक विकास दिखाया है। मुख्य रूप से बेसिक मेटल्स, मोटर वाहन और मशीनरी जैसे कोर और निवेश से जुड़े क्षेत्रों में लगातार मजबूती बनी हुई है।
माइनिंग: माइनिंग सेक्टर ने भी इस अवधि के दौरान बेहतर प्रदर्शन करते हुए 5.5 प्रतिशत का विस्तार दर्ज किया है।
इलेक्ट्रिसिटी: इन सब के विपरीत, बिजली उत्पादन के मोर्चे पर सुस्ती देखने को मिली। इसमें मात्र 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिसने समग्र उत्पादन की गति को थोड़ा सीमित कर दिया।
निवेश और उपभोक्ता मांग के मिले-जुले रुझान-घरेलू मांग और बाहरी आर्थिक परिस्थितियों से मिल रहे मिश्रित संकेतों के बीच, उपयोग-आधारित आंकड़ों ने देश में मजबूत निवेश के सकारात्मक रुझान पेश किए हैं:
कैपिटल गुड्स: पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में 14.6 प्रतिशत का बड़ा उछाल आया है, जो देश में औद्योगिक क्षमता विस्तार और स्वस्थ निवेश मांग को साफ तौर पर दशार्ता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर: बुनियादी ढांचे और निर्माण से जुड़ी वस्तुओं के आउटपुट में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
कंज्यूमर गुड्स: उपभोक्ता क्षेत्र में मिले-जुले रुझान रहे। जहां कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (टिकाऊ वस्तुएं) में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, वहीं गैर-टिकाऊ वस्तुओं में केवल 1.1 प्रतिशत का मामूली इजाफा हुआ।
आगे की राह-औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक स्वास्थ्य को मापने का एक प्रमुख पैमाना माना जाता है। मार्च के महीने में दर्ज की गई यह आंशिक तेजी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वित्तीय वर्ष के अंत में कारखानों की गतिविधियों में निरंतर गति बनी हुई है। कैपिटल गुड्स और मैन्युफैक्चरिंग में दर्ज की गई यह मजबूती नए वित्तीय वर्ष में प्रवेश करते समय अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थिर विकास पथ की नींव रख रही है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button