बाराबंकी
बिजली विभाग के रोस्टिंग से जनता की नींद गायब भीष्ण गर्म में झेल रहे बिजली की मार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बाराबंकी। समस्त ग्रामीण फीडर 1 घंटा, दो घंटा , तीन घंटा रोस्टिंग मे बंद के मैसेज देख देख कर ग्रामीण उपभोक्ताओं की रात कट रही है करीब 12 घंटे की रात मे 7 घंटे रोस्टिंग मे बीत रहें है जिससे ग्रामीणों की नींदे पूरी न होने के कारण बीमार होते जा रहें है। नतीजा यह है कि सरकार का 18 घंटे विद्युत आपूर्ति का दावा बेमतलब साबित हो रहा जिससे ग्रामीणों मे विद्युत विभाग के प्रति काफी रोष व्याप्त है ।
भीषण गर्मी के बीच रोस्टिंग और अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ता बेहाल हैं अत्यधिक लोड और मेंटेनेंस के नाम पर हो रही घंटों की कटौती से लोगों के इनवर्टर जवाब दे रहे हैं और कूलर-पंखे बंद होने से जनजीवन प्रभावित है। विद्युत उपकेंद्र मसौली के आधा दर्जन फीडरो से करीब दो सैकड़ा से अधिक गाँवो की करीब ढाई लाख आबादी को बिजली पहचाई जा रही है जिन्हे इस भीषण गर्मी मे रोस्टिंग के मैसेज देख देख राते गुजार रहें है। भीषण गर्मी और नवतपा के प्रचंड ताप के बीच लगातार हो रही विद्युत कटौती से आमजन का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। विद्युत विभाग द्वारा कभी 33 केवी लाइन फॉल्ट, कभी फीडर ब्रेकडाउन, तो कभी तार टूटने और रोस्टिंग का हवाला देकर घंटों बिजली आपूर्ति बाधित की जा रही है।
मामला विद्युत उपकेंद्र मसौली का है, जहां पर हर रात रोस्टिंग का खेल किया जा रहा है कहने को सरकार ग्रामीण क्षेत्रो मे 18 घंटे आपूर्ति का दावा किया जा रहा जबकि हकीकत यह है वर्तमान समय मे क्षेत्र मे बामुश्किल 6 से 7 घंटे विजली मिल पा रही जिससे उपभोक्ताओं की नींद पूरी नहीं हो पा रही है और उपभोक्ता बीमार हो रहें है।
ग्राम मसौली के मोहल्ला भूलीगंज सैफ, मसौली कटरा जावेद, हुसैनगंज निवासी मो0 हसन, खालिद का कहना है कि बिजली न रहने से लोगों को उमसभरी गर्मी में पूरी रात जागकर बितानी पड़ी। पंखे, कूलर और पानी की व्यवस्था ठप होने से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं तथा मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। रोस्टिंग का सबसे बड़ा दर्द उपभोक्ताओं को सुरज ढलने के साथ शुरु होने वाली रोस्टिंग के साथ शुरु होती है हर आधे घंटे विद्युत आपूर्ति के बाद एक घंटे, दो घंटे, तीन घंटे रोस्टिंग के मैसेज आने लगते है जिसका क्रम सुबह तक चलता रहता है
बड़ागांव निवासी उपभोक्ता अजमी किदवाई का कहना है कि हर दिन हर आधे घंटे बाद 2 से 3 घंटे रोस्टिंग होती है और रात में तीन से चार बार रोस्टिंग का दंश उपभोक्तों का झेलना पड़ता हा।
बड़ा गांव के ही उपभोक्ता मोहित यादव का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे बिजली की सप्लाई तय की गई है, लेकिन इस भीषण गर्मी में 7 से 8 घंटे ही आपूर्ति हो पा रही है, वह भी लगातार नहीं है। उपभोक्ता मायाराम यादव ने बताया कि विभाग द्वारा कटौती का समय निर्धारित हो जाता तो लोग अपना कार्य समय से निपटा लेते, लेकिन बीच-बीच में कटौती होती रहती है। जिससे उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बुधवार की शाम 8 बजकर 30 मिनट से 10 बजकर 30 मिनट तक की रोस्टिंग, 15 मिनट बिजली रहने के बाद फिर दो घंटे की रोस्टिंग, फिर आधा घंटे रहने के बाद 3 घंटे की रोस्टिंग 3 बजकर 30 मिनट आपूर्ति सुचारु हो सकी।
इस संबंध मे जब हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत की गयी तो बताया गया कि 11 बजकर 45 मिनट के बाद को भी रोस्टिंग नहीं है जबकि पूरी पूरी रात्रि बिजली गायब रहती है।



