कैराना

गीले चोकर के नाम पर पशुओं को खिलाया जा रहा संदिग्ध पदार्थ

दूध की गुणवत्ता पर मंडराया खतरा

दूध बढ़ाने के लालच में पशुओं की सेहत से खिलवाड़, बाजारों व डेयरियों तक पहुंच रही संदिग्ध सामग्री
बड़े वाहनों से क्षेत्र में सप्लाई होने की चर्चा, जांच के अभाव में धड़ल्ले से चल रहा कारोबार
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। क्षेत्र में इन दिनों पशुओं के लिए बिक रहे गीले चोकर और अन्य पशु आहार को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि दूध उत्पादन बढ़ाने के नाम पर पशुओं को संदिग्ध व संभावित केमिकल युक्त पदार्थ खिलाए जा रहे हैं, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। मामला लंबे समय से चर्चा में होने के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से अब तक कोई व्यापक जांच अभियान सामने नहीं आया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े वाहनों के माध्यम से गीले चोकर के नाम पर सामग्री लाई जा रही है, जिसे प्लास्टिक के ड्रमों व अन्य कंटेनरों में भरकर डेयरियों, पशुपालकों और किसानों तक पहुंचाया जाता है। बताया जा रहा है कि इस सामग्री को पशुओं के चारे में मिलाकर दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से खिलाया जा रहा है। पशुपालकों का कहना है कि अधिक दूध उत्पादन की होड़ में कुछ लोग बिना गुणवत्ता और मानकों की जांच किए ऐसे पदार्थों का उपयोग कर रहे हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पशुओं को लंबे समय तक मिलावटी या संदिग्ध सामग्री खिलाई जाती है तो इसका असर दूध की गुणवत्ता पर पड़ सकता है, जिसका प्रभाव सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले दूध पर पड़ने की आशंका रहती है। लोगों का कहना है कि दूध आम जनजीवन का महत्वपूर्ण खाद्य पदार्थ है और इसकी गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। ऐसे में पशु आहार की गुणवत्ता की नियमित जांच आवश्यक है।लोगों ने पशुपालन विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और प्रशासन से संयुक्त रूप से अभियान चलाकर बाजार में बिक रहे गीले चोकर और अन्य पशु आहार की जांच कराने की मांग की है। साथ ही संदिग्ध सामग्री के नमूने लेकर लैब जांच कराने और मानक विहीन पाए जाने पर कार्रवाई की मांग उठाई है।
क्या बोले पशु चिकित्सा अधिकारी
पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद ने बताया कि गीले चोकर में कार्बोहाइड्रेट होने के कारण पशु इसे खाते हैं। इसमें क्या-क्या तत्व या सामग्री मिलाई गई है, इसका पता लैब जांच के बाद ही चल सकेगा। उन्होंने कहा कि यदि पशुपालक इसका उपयोग कर रहे हैं तो सीमित मात्रा में ही खिलाएं तथा गर्भधारण वाले पशुओं को यह नहीं खिलाया जाना चाहिए। अब बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से इस प्रकार की सामग्री खुलेआम बिक रही है तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां है और इसकी गुणवत्ता जांच के लिए अब तक कोई प्रभावी अभियान क्यों नहीं चलाया गया?
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button