बोकारो

दीवारों पर जान फूंक देते हैं माटी चित्रकार महावीर शामी 

 ऊपरघाट की दीवारों पर झारखंड की संस्कृति उकेर रहे हैं महावीर शामी

महावीर ने झारखंड की सम्यता व संस्कृति के लिए छोड़ दी अच्छे पैकेज की नौकरी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

बोकारो। बोकारो जिले के नावाडीह प्रखण्ड स्थित ऊपरघाट के मुंगोरंगामाटी पंचायत के कोठी गांव में स्व टेकलाल महतो ग्रामीण स्टेडियम सज रहा है झारखंडी संस्कृति से ढोल मांदर, धरती आबा बिरसा मुंडा, टेकलाल महतो बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर, भगत सिंह डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम, झारखंड के पितामह विनोद बिहारी महतो,शेरे शिवा महतो , टाइगर जगरनाथ महतो व करम परब के चित्र से सजा रहे हैं धनबाद बाघमारा कपूरिया बांधडीह निवासी माटी चित्रकार महावीर शामी पिछले 8 दिनों से निःशुल्क चित्रण कर रहे हैं ज्ञात हो कि माटी चित्रकार का मिशन है कि झारखंड के 32640 गांवों को निःशुल्क झारखंड संस्कृति को सार्वजनिक स्थलों पर उकेरना।
भाषाई आंदोलन के बाद महावीर शामी में एक ऐसा जुनून बना कि झारखंड की हो रही लुफ्त भाषा, संस्कृति, सभ्यता,रहन सहन, पारंपरिक वेशभूषा को जिंदा रखने की शपथ ली। अच्छी खासी नौकरी प्रोफेसर को त्यागकर घर से निकल पड़े है। अपनी मां, पत्नी और बच्चे को छोड़कर महाबीर का सोच है झारखंड के सभी राजस्व गांव 32640 में चित्रकारी के माध्यम से सभी झारखंडी को अपनी सभ्यता, संस्कृति,भाषा के तरफ लाने का प्रयास किया जाएगा। महावीर शामी काशी विश्वविद्यालय (बीएचयू) से स्नातक और इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय से खैरगढ़ से फाइन आर्ट्स में परास्नातक (एम एफ ए) किया। जिसके बाद देवघर व लातेहार के कॉलेजों में प्रोफेसर के पद पर काम किया। स्टेडियम में कलाकृतियां देखकर क्षेत्र के लोग शामी के काम को काफी सराहना कर रहे हैं।शामी ने झारखंड सरकार से मांग भी किया है कि स्थानीय कलाकर, गीतकार, संगीतकार,शिल्पा कार, कारीगर,गायक,कवि,को प्रोत्साहित करें और उसे सम्मान राशि देकर झारखंड की अस्मिता को बचाए। अभी शामी ने झारखंड के 200गांवों में 3000 वर्ग फीट पर अपनी कलाकृतियां उकेरी हुई है। इनकी कलाकृति से दीवारों पर जान आ जाती है। इनकी कलाकृति को देखने के लिए क्षेत्र के लोग काफी तादाद में कोठी गांव पहुंच रहे हैं। इनकी हौसला बढ़ाने के लिए कसमार प्रखंड के महिलाएं कोठी गांव पहुंच कर पुरानी शादी ब्याह के गाने क्षेत्र वासियों को सुना रहे हैं।शामी ने कोठी गांव का भ्रमण कर जुआठ, बैलगाड़ी,लकड़ी के दरवाजे बनाने को सम्मानित करते नजर आ रहे हैं। वही महावीर शामी ने रक्तदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं आजतक 17 लोगों को निशूल्क रक्त दान किया है। शामी ने झारखंड सरकार से मांग किया है कि आंगनबाड़ी केंद्र की तरह हर गांव में कला संगीत केंद्र झारखंडी भाषा में खोला जाय, ताकि झारखंड की भाषा संस्कृति सभ्यता को जीवंत बनाए रखा जा सके। गांव के समाजसेवी युवाओ अथवा आदि ग्रामीणों द्वारा रंग ब्रश, खाना वगैरह सुविधा उपलब्ध करा रहे ।

महावीर की निःशुल्क सेवा
महावीर शामी का लक्ष्य झारखंड के सभी 32,640 गांवों की दीवारों को पारंपरिक कला के रंगों से सराबोर करना है। पिछले चार वर्षों में वे धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग, रांची, खूंटी, रामगढ़ और सरायकेला-खरसावां सहित कई जिलों के 200 से अधिक गांवों का भ्रमण कर चुके हैं। अब तक वे 55,000 वर्ग फीट से अधिक दीवारों पर अपनी कलाकृतियां बना चुके हैं। सबसे खास बात यह है कि उनकी यह अनूठी सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है, वे इसके लिए कोई पारिश्रमिक नहीं लेते, ग्रामीण केवल उनके लिए रंग और बुनियादी सामग्री की व्यवस्था करते हैं।

 

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