गोड्डा

लाइफ केयर अस्पताल में बच्चे की मौत

परिजनों ने सड़क जाम कर किया हंगामा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
गोड्डा। नगर थाना क्षेत्र स्थित लाइफ केयर अस्पताल में इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत से आक्रोशित परिजनों ने गोड्डा-भागलपुर मुख्य सड़क को जाम कर प्रदर्शन किया। सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी ली। मृतक बच्चे की पहचान घटियारी निवाशी विवेक कुमार रूप में हुई है। पिता श्याराम साह ने बताया कि विवेक 30 मई से बीमार था। उसे पहले गोड्डा के संजीवनी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दो दिनों तक इलाज के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ।
इसके बाद परिजनों ने उसे गोड्डा के डॉ. नरेंद्र कुमार के निजी क्लीनिक में दिखाया। डॉ. नरेंद्र कुमार ने जांच के बाद बच्चे को तत्काल लाइफ केयर अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी। परिजनों ने बच्चे को लाइफ केयर अस्पताल में भर्ती कराया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में नर्स द्वारा सुई दिए जाने के एक घंटे के भीतर बच्चे की तबीयत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लाइफ केयर अस्पताल में ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं और न ही समय पर कोई डॉक्टर मौजूद रहता है। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल सिर्फ नर्स के भरोसे चल रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से ऐसे अस्पतालों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।
लाइफ केयर अस्पताल के संचालक हरि किशोर कुमार ने बताया कि बच्चा पिछले तीन-चार दिनों से बीमार था और मलेरिया, टाइफाइड तथा लो बीपी से ग्रसित था। उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉ. नरेंद्र कुमार द्वारा लिखी गई सुई ही बच्चे को दी गई थी। वहीं, डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चा बहुत गंभीर हालत में था और उसे भागलपुर रेफर किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि लाइफ केयर अस्पताल में बच्चे को केवल बुखार की सुई और दवा दी गई थी, ताकि उसे भागलपुर तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, बच्चे की मौत सुई या दवा से नहीं, बल्कि बीमारी के कारण हुई है। हालांकि, परिजनों ने अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाया है और पूछा है कि ऐसे अस्पतालों को किस आधार पर लाइसेंस दिया जाता है। झारखंड पुलिस में कार्यरत मृतक बच्चे के पिता ने अपना दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने चार साल पहले अपनी पत्नी को खो दिया था और अब अपने इकलौते बेटे को भी खो दिया है। उन्होंने इस घटना को केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों का आईना बताया जहां अस्पताल स्वास्थ्य व्यस्था से नहीं बल्कि किस्मत के भरोसे चल रहा है। परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि अस्पताल की लापरवाही सामने आती है, तो उसका लाइसेंस रद्द किया जाए। इस घटना ने उन निजी अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता को उजागर किया है, जहां पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था के बिना मरीजों के जिंदगी दाव पर लगाया जा रहा है।
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