ललितपुर

धनुषधारी मंदिर की करोड़ों की संपत्ति पर कब्जे का आरोप

न्यायालय के आदेश से बढ़ी विवाद की गूंज

तालाबपुरा स्थित प्राचीन मंदिर को लेकर पुजारी परिवार और समिति आमने-सामने
सीजेएम कोर्ट ने पुलिस जांच पर उठाए सवाल
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। शहर के तालाबपुरा स्थित प्राचीन धनुषधारी मंदिर की करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति को लेकर विवाद एक बार फिर चर्चा में है। मंदिर के पुजारी परिवार ने कुछ लोगों और एक समिति पर मंदिर की संपत्ति पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया है। वहीं हाल ही में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय के आदेश के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। मंदिर से जुड़े गौरीशंकर चौबे उर्फ कल्लन ने बताया कि धनुषधारी मंदिर का निर्माण करने वाले बढ़ोनिया बाबा की कोई संतान नहीं थी। उनके अनुसार बाबा की सेवा और देखभाल उनके पूर्वजों द्वारा की जाती थी। इसी कारण वर्ष 1930 में मंदिर तथा उसकी देखरेख से संबंधित अधिकारों की वसीयत उनके पूर्वज श्रीलक्ष्मी नारायण चौबे के नाम कर दी गई थी। चौबे परिवार का दावा है कि पिछले लगभग 120 वर्षों से उनका परिवार मंदिर की सेवा, पूजा-पाठ और प्रबंधन करता आ रहा है। आरोप है कि मंदिर की बहुमूल्य संपत्ति पर नजर पडऩे के बाद कुछ लोगों ने एक समिति का गठन कर मंदिर को अपने समाज का मंदिर बताना शुरू कर दिया। पुजारी महेश चौबे का आरोप है कि वर्ष 2024 में उनके साथ मारपीट कर उन्हें मंदिर परिसर से बाहर कर दिया गया और मंदिर के संचालन पर कब्जा कर लिया गया। पुजारी परिवार का यह भी आरोप है कि उस समय पुलिस प्रशासन ने उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की। परिवार का कहना है कि लगातार विवाद, उत्पीडऩ और अपमान के कारण महेश चौबे के पिता रामनारायण चौबे मानसिक रूप से आहत हुए और बाद में उनका निधन हो गया। परिवार इस पूरे घटनाक्रम को अपनी पीड़ा और संघर्ष का कारण बता रहा है। मामले में नया मोड़ तब आया जब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय ने अपने आदेश में वसीयत को प्रथम दृष्टया वैध मानते हुए पुलिस की जांच आख्या पर भी सवाल उठाए। न्यायालय ने टिप्पणी की कि गहोई सेवा समिति का गठन सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों के लिए किया गया था, न कि मंदिर के प्रबंधन अथवा स्वामित्व के लिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी समिति का पंजीकरण मात्र उसे मंदिर की संपत्ति पर स्वामित्व का अधिकार प्रदान नहीं करता। न्यायालय के आदेश के बाद मंदिर की संपत्ति और प्रबंधन को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। अब सभी की निगाहें आगामी कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक निर्णयों पर टिकी हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर मंदिर की वास्तविक स्थिति और अधिकारों को स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि वर्षों से चले आ रहे विवाद का समाधान हो सके।
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