गाजियाबाद
14 दिन बाद भी नहीं मिला ओमकार का शव
परिजनों ने फिर बुलाई पंचायत; पुलिस पर वादाखिलाफी के आरोप
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : गनौली निवासी ओमकार उर्फ ओमन के अपहरण और हत्या के चर्चित मामले में नामजद सभी आरोपियों की गिरफ्तारी होने के बावजूद मृतक का शव 14 दिन बाद भी बरामद नहीं हो सका है। यही वजह है कि पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों में लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अब ओमकार के परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए चिरौड़ी में एक बार फिर अपने समाज और क्षेत्र के लोगों की पंचायत बुलाने का आह्वान किया है।
इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म है। लोगों का कहना है कि जब पुलिस नामजद सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, तब भी ओमकार का शव बरामद न होना जांच की दिशा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें अधिकारियों द्वारा बार-बार आश्वासन दिए गए, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
गिरफ्तारी हुई, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम
पुलिस के अनुसार इस मामले में नामजद तीन आरोपियों को लोनी पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया, जबकि दो अन्य मुख्य आरोपियों को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मालवीय नगर क्षेत्र में मुठभेड़ के बाद पकड़ा। इस प्रकार घटना में नामजद सभी आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में बताए जा रहे हैं।
इसके बावजूद ओमकार का शव अब तक बरामद नहीं हो पाया है। पुलिस लगातार यह दावा करती रही है कि हत्या के बाद शव को गंग नहर में फेंका गया था, लेकिन कई जिलों तक चलाए गए सघन तलाशी अभियान के बावजूद शव का कोई सुराग नहीं मिला है। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस की जांच सही दिशा में है भी या नहीं।
पहले टली थी पंचायत
ओमकार हत्याकांड को लेकर बढ़ते जनाक्रोश के बीच पहले भी चिरौड़ी में एक बड़ी पंचायत प्रस्तावित थी। उस समय स्थानीय विधायक नंदकिशोर गुर्जर, जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर और पीड़ित परिवार के बीच हुई मुलाकात में अधिकारियों द्वारा इस मामले का शीघ्र खुलासा करने तथा ओमकार का शव जल्द बरामद कराने का आश्वासन दिया था। अधिकारियों के अनुरोध और भरोसे के बाद पीड़ित परिजनों ने पंचायत स्थगित कर दी थी।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा किया, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो शव बरामद हुआ और न ही उन्हें कोई संतोषजनक जानकारी दी गई। इसी कारण अब दोबारा पंचायत बुलाने का निर्णय लिया गया है।
पुलिस पर उठ रहे सवाल
घटना के बाद से पुलिस ने एक दर्जन से अधिक टीमें गठित करने, विभिन्न जिलों में सर्च अभियान चलाने और सैकड़ों पुलिसकर्मियों तथा गोताखोरों को तलाश में लगाने के दावे किए हैं। इसके बावजूद 14 दिन बाद भी शव बरामद न होना पुलिस की कार्यक्षमता पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आरोपियों से पूछताछ में हत्या और शव को ठिकाने लगाने की पूरी और सही जानकारी मिल चुकी है, तो फिर शव बरामद करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। कई लोगों का मानना है कि पुलिस केवल दावे कर रही है, जबकि मामले के सबसे महत्वपूर्ण पहलू पर अब तक सफलता नहीं मिल सकी है।
दिल्ली पुलिस द्वारा दो मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी गाजियाबाद पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठे थे। अब शव बरामद न होने से पुलिस की आलोचना और तेज हो गई है।
आज की पंचायत पर सबकी नजर
परिजनों द्वारा चिरौड़ी में बुलाई गई पंचायत को लेकर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं। पंचायत में कितनी संख्या में लोग पहुंचते हैं और वहां क्या निर्णय लिया जाता है, यह आने वाले घटनाक्रम को प्रभावित कर सकता है। क्षेत्र में पहले से मौजूद जनाक्रोश को देखते हुए पंचायत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उधर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। अधिकारियों ने पंचायत और उससे जुड़े घटनाक्रम पर नजर बनाए रखी है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
परिवार को अब सिर्फ एक इंतजार
ओमकार के परिजनों का कहना है कि उन्हें किसी बयान या दावे से ज्यादा अपने बेटे का शव चाहिए। परिवार पिछले 14 दिनों से अंतिम दर्शन और अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा कर रहा है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद भी जब शव नहीं मिला, तो उनके मन में कई सवाल और आशंकाएं पैदा हो गई हैं।
फिलहाल पूरा क्षेत्र इस बात का इंतजार कर रहा है कि पंचायत में क्या निर्णय निकलता है और पुलिस प्रशासन ओमकार के शव की बरामदगी को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है। क्योंकि इस चर्चित हत्याकांड में अब सबसे बड़ा सवाल केवल एक ही है आखिर ओमकार का शव कहां है?

