मथुरा

श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर एक करोड़ का हर महीने है चढ़ावा

अयोध्या के बाद उठी अब यहां ऑडिट की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं की संख्या में पहले की अपेक्षा अब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में हर माह करीब एक करोड़ रुपये का दान मंदिर को मिलता है। मंदिर परिसर में लगाई गई गोलक में ही 80 प्रतिशत तक दान श्रद्धालु करते हैं, जबकि 20 प्रतिशत दान ही ऑनलाइन होता है। अयोध्या के बाद अब यहां भी ऑडिट कराए जाने की मांग उठ रही है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने के साथ ही दान की राशि भी बढ़ रही है। यहां परिसर में स्थित भागवत भवन, केशव देव मंदिर, योग माया मंदिर, गर्भगृह आदि स्थानों पर गोलक (दान पेटिका) लगाई गई हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु गोलक में ही दानराशि अर्पित करते हैं। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि प्रतिदिन गोलक खोली जाती हैं। दानराशि की गिनती के लिए छह से दस कर्मचारी लगते हैं। छोटे नोट काफी अधिक होते हैं, इसलिए इतने कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है, पारदर्शिता रखने के लिए कर्मचारी बदलते रहते हैं। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि पूरे मंदिर परिसर को सीसीटीवी से लैस किया गया है। रुपये की गिनती भी सीसीटीवी के निगरानी में होती है। दो कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वह बैंक में प्रतिदिन पैसा जमा करते हैं। यदि बैंक में किसी दिन अवकाश होता है तो फिर दान राशि अगले दिन जमा की जाती है। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि अभी तक दानराशि की गिनती की सीसीटीवी रिकार्डिंग एक माह तक सेव रहती है, लेकिन अब उसे एक वर्ष के लिए सुरक्षित रखेंगे। इसके लिए उपकरण खरीदने की बात हो गई है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा कहते हैं कि मंदिर के बाहर दान लेने का कोई काउंटर नहीं है, जो भी दान लिया जाता है, उसके लिए मंदिर के अंदर ही काउंटर हैं, गोलक हैं। मंदिर का सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी होने का वह दावा कर रहे हैं, उनका कहना है कि पांच हजार रुपये से अधिक का भुगतान नकद नहीं किया जाता है। आज तक दान प्रबंधन को लेकर आयकर विभाग ने भी कोई नोटिस नहीं दिया है। मंदिर में आभूषण का चढ़ावा न के बराबर होता है। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि आरोपों में आभूषणों को खुर्द बुर्द करने का आरोप है, जबकि मंदिर में तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है। सीआरपीएफ, पुलिस और पीएसी जन्मस्थान पर सुरक्षा को तैनात है। कोई एक बैग भी मंदिर के अंदर नहीं ले जा सकता है। ऐसे में दानराशि या फिर आभूषणों में हेरफेर कैसे किया जा सकता है।
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