
नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्टों के आधार पर पिछले 5 साल में केवल एक आपराधिक मामला दर्ज हुआ, वह भी अब बंद हो चुका है। यह जानकारी लोकसभा में दिए गए लिखित उत्तर में सामने आई।
सांसद नीरज मौर्य और सांसद सुनील बोस के सवाल पर कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि कैग रिपोर्ट पर 12 जुलाई 2022 को कोयला ब्लॉक आवंटन में सीबीआई ने एकमात्र केस दर्ज किया था। जांच पूरी होने पर 31 मार्च 2025 को कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई।
वहीं 2022-23 से 2026-27 के बीच कैग विभाग पर वेतन व अन्य मदों में 30,642 करोड़ रुपये खर्च हुए। इस पर विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब कार्रवाई नगण्य है तो जवाबदेही कैसे तय होगी।
सरकार ने कहा कि कैग रिपोर्ट पर मंत्रालय ATN बनाते हैं, PAC समीक्षा करती है और वित्तीय अनुशासन के लिए कदम उठाए जाते हैं। हालांकि कैग की सिफारिशों को बाध्यकारी बनाने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है।



