
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा। एसओजी के नाम पर हाईवे पुलिस ने नशे के इंजेक्शन के साथ पकड़े गए एक आरोपित को तीन लाख रुपये लेकर छोड़ दिया। मामले का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस महकमे में खलबली मची हुई है।
शुक्रवार को वही आरोपित एसओजी के हत्थे चढ़ गया। पूछताछ में उसने एसओजी पर तीन लाख रुपये लेकर छोड़ने का आरोप लगाया। जांच की गई तो राज खुल गया। प्रारंभिक जांच में हाईवे थाना प्रभारी और हेडकांस्टेबल की भूमिका सामने आने पर उन्हें हटा दिया गया है। एसएसपी ने गोपनीय जांच शुरू कराई है। हाईवे थाना पुलिस ने कुछ दिन पूर्व गोवर्धन चौराहा शिवनगर कालोनी के रहने वाले देवेंद्र को नशे के इंजेक्शन के साथ पकड़ा था। कार्रवाई के बजाय आरोपित को एसओजी के नाम पर डराया गया। आरोप है कि तीन लाख रुपये की रकम लेने के बाद उसे छोड़ दिया गया। आरोपित के पुलिस के शिकंजे से निकलने के बाद मामला दबा रहा। शुक्रवार को एसओजी ने उसे दोबारा पकड़ लिया और उसे गोविंद नगर थाने के सिपुर्द कर मुकदमा दर्ज करा दिया। पकड़े गए आरोपित ने दावा किया कि कुछ दिन पूर्व ही एसओजी ने उसे नशीले इंजेक्शन के साथ हाईवे क्षेत्र से पकड़ा था और तीन लाख रुपये लेने के बाद छोड़ दिया था। यह जानकारी होने पर एसओजी के होश उड़ गए। टीम ने एसएसपी को जानकारी दी कि एसओजी के नाम को हाईवे पुलिस बदनाम कर रही है। एसएसपी श्लोक कुमार ने प्रारंभिक जांच कराई। इसमें हाईवे थाना प्रभारी प्रशांत कपिल और थाने के हेडकांस्टेबल सतेंद्र दुबे की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इसके बाद थाना प्रभारी को हाईवे थाने से हटाकर पर्यटन थाना भेज दिया और हेडकांस्टेबल को हाईवे थाने से हटाकर कृष्ण जन्मस्थान (केजेएस) भेज दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस प्रकरण की एसएसपी गोपनीय जांच करा रहे हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस संबंध में कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।



