प्रेम परवान चढ़ा… तो पति की जिंदगी उतर गई मौत के अंधेरे में!
घर में कथित प्रेमी को देख लिया था रमाशंकर ने… विवाद के बाद गला दबाकर हत्या, फिर सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश

जिस घर में लौटता था भरोसा, वहीं लिखी गई मौत की इबारत
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली : घर वह जगह जहां इंसान दिनभर की थकान के बाद सुकून तलाशता है। जहां रिश्ते भरोसे की दीवारों पर टिके होते हैं और जहां लौटकर आने वाला व्यक्ति यह उम्मीद करता है कि अपनों के बीच वह सबसे सुरक्षित है।
लेकिन एनसीएल की बीना परियोजना में सीनियर ओवरमैन रमाशंकर मिश्रा की मौत की कहानी में यही भरोसा कथित तौर पर सबसे भयावह मोड़ पर पहुंच गया।
पुलिस के अनुसार, 22 अगस्त को रमाशंकर ने अपनी पत्नी प्रियंका मिश्रा और उसके कथित प्रेमी विकास चौहान को घर में देख लिया था। इसके बाद विवाद हुआ। पुलिस का दावा है कि विवाद बढ़ा और देखते ही देखते घर के भीतर ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने एक परिवार की दुनिया उजाड़ दी।
आरोप है कि प्रियंका और विकास ने मिलकर रमाशंकर का गला दबाया और फिर पत्थर के फर्श पर उसका सिर पटक दिया।
कुछ पल…
कुछ रिश्ते…
और एक जिंदगी।
जिस घर में रमाशंकर अपने परिवार के लिए लौटता था, उसी घर में उसकी जिंदगी का कथित तौर पर आखिरी अध्याय लिख दिया गया।
एक पति चला गया।
एक परिवार का सहारा छिन गया।
और पीछे रह गया—एक ऐसा सवाल, जिसका जवाब अब अदालत की चौखट पर तलाशा जाएगा।
मौत के बाद भी जारी रही ‘हादसा’ बनाने की कथित कहानी
मौत के बाद भी साजिश का सिलसिला थमा नहीं।
पुलिस के मुताबिक, हत्या को सड़क दुर्घटना का रूप देने की कथित योजना बनाई गई। शव को चादर और गमछे में लपेटकर घर से बाहर ले जाया गया और बीना स्टेडियम, जमशीला के पास सड़क किनारे रख दिया गया। पुलिस का दावा है कि इसके बाद वाहन से शव को चोट पहुंचाकर घटना को सड़क हादसा दिखाने की कोशिश की गई। 23 अगस्त की रात जब सड़क किनारे रमाशंकर का शव मिला, तो शुरुआती तौर पर मामला दुर्घटना जैसा दिखाई दिया।
लेकिन हर हादसा सिर्फ हादसा नहीं होता।
कभी-कभी घटनास्थल कुछ ऐसे सवाल छोड़ जाता है, जो पूरी कहानी को फिर से पढ़ने के लिए मजबूर कर देते हैं।
पुलिस के सामने भी सवाल खड़े हुए—
क्या यह सचमुच सड़क हादसा था?
रमाशंकर का शव यहां तक कैसे पहुंचा?
शरीर पर मिले निशान क्या किसी और कहानी की तरफ इशारा कर रहे थे?
और अगर यह हादसा नहीं था, तो मौत के पीछे कौन था?
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के मुताबिक कथित प्रेम-प्रसंग, घर के भीतर हुए विवाद और शव को ठिकाने लगाने की कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ती चली गईं।
जिस मौत को कथित तौर पर सड़क दुर्घटना की धूल में दबाने की कोशिश की गई, जांच ने उसके पीछे छिपी कहानी को सामने लाने का दावा किया।
प्रेम की कहानी का अंत… गिरफ्तारी की चौखट पर
जांच के बाद पुलिस ने मामले में प्रियंका मिश्रा, विकास चौहान, अनुराग सिंह उर्फ बादल और जमशीला निवासी सोनू गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, अनुराग और सोनू ने शव को ठिकाने लगाने में कथित रूप से मदद की।
थाना प्रभारी निरीक्षक सत्येंद्र कुमार राय के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और पूछताछ के आधार पर चारों आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई और उनका चालान किया गया है। एक तरफ रमाशंकर की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में छोड़ दिया है।
दूसरी तरफ जिस कथित प्रेम-प्रसंग से इस कहानी की शुरुआत बताई जा रही है, उसके किरदार अब कानून की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं।
प्रेम था… या रिश्तों के टूटने की वह सीमा, जहां जिंदगी ही खत्म हो गई?
मोहब्बत थी…
या मौत की कथित पटकथा?
भरोसा था…
या भरोसे के भीतर पनपता कोई ऐसा राज, जो अंततः एक जिंदगी निगल गया?
इन सवालों के अंतिम जवाब जांच और अदालत की प्रक्रिया से ही सामने आएंगे।
सबसे बड़ा सवाल:
रिश्ते सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं होते। वे भरोसे से बनते हैं और विश्वास से जिंदा रहते हैं।
जब उसी भरोसे की जमीन दरक जाए, तो उसका असर सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं रहता—पूरा परिवार उसकी कीमत चुकाता है।
रमाशंकर मिश्रा की मौत की यह कहानी, पुलिस के आरोपों के आईने में, सिर्फ एक हत्या की जांच नहीं है।
यह उस सवाल की भी कहानी है कि जब रिश्तों में विश्वास मर जाता है, तो क्या कभी-कभी उसकी कीमत जिंदगी देकर चुकानी पड़ती है?



