
बेंगलुरु। 1999 के कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त जवान ने आत्महत्या करने की कोशिश की।
मराठा लाइट इन्फैंट्री के नायक (सेवानिवृत्त) शिवानंद रेड्डी 24 साल से सरकार द्वारा वादा की गई जमीन के आवंटन का इंतजार कर रहे थे। कर्नाटक के डिप्टी सीएम जी. परमेश्वर से मिलने से रोके जाने के बाद उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।
फिलहाल पूर्व सैनिक शिवानंद रेड्डी का एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।
डिप्टी सीएम से मिलना चाहते थे-यह घटना 29 अगस्त की बताई जा रही है। कारगिल युद्ध के दौरान घायल हुए शिवानंद रेड्डी अपनी लंबित पड़ी जमीन के मुद्दे पर मदद मांगने के लिए डिप्टी सीएम से मिलना चाहते थे। हालांकि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उन्हें डिप्टी सीएम से मिलने की अनुमति नहीं दी।
रेड्डी को उनकी देश सेवा के सम्मान में उनके गृहनगर चिंतामणि में जमीन आवंटित की जानी थी। दो दशकों से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल सका।
निराशा में उठाया आत्मघाती कदम-सरकारी तंत्र के चक्कर काटने और आखिरकार डिप्टी से मुलाकात न हो पाने से निराश होकर उन्होंने अपनी जान देने की कोशिश की।



