
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
नई दिल्ली। कक्षा 12 के बाद जब परिवार नीरज कुमार के कॉलेज दाखिले की तैयारी कर रहा था, तब उन्होंने माता-पिता से एक अलग मांग रखी। नीरज ने कहा कि कॉलेज के लिए बचाए पैसे से उन्हें राइफल दिला दी जाए।
“मुझे राइफल दिला दो, कॉलेज की डिग्री बाद में देख लूंगा। पहले मुझे शूटिंग करनी है,” नीरज याद करते हैं।
करीब 3-3.5 लाख रुपये की राइफल खरीदना परिवार के लिए बड़ा फैसला था। नीरज ने 14 साल की उम्र में 2014 में एनसीसी के जरिए शूटिंग शुरू की थी। शुरुआत 50 मीटर राइफल प्रोन से हुई। लगातार पदक जीतने के बाद उनका भरोसा बढ़ा और उन्होंने शूटिंग को करियर बनाने का फैसला किया।
संसाधनों की कमी के कारण उन्हें कभी किराये की राइफल से खेलना पड़ा तो कभी छोटे एनसीसी कैडेट्स को पढ़ाकर उनके प्रशिक्षण के आखिरी 15-20 मिनट में खुद अभ्यास करना पड़ा। एक समय उन्होंने शूटिंग छोड़ने तक का फैसला कर लिया था। इसके बाद माता-पिता ने उन पर भरोसा जताते हुए राइफल खरीद दी।
2016 में जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत और 2017 में स्वर्ण जीतने के बाद नीरज ने जनवरी 2018 में खेल कोटे से भारतीय नौसेना में प्रवेश किया।
बाद में उन्होंने 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन पर ध्यान दिया। शुरुआत में समर्पित कोच नहीं होने पर उन्होंने यूट्यूब पर आईएसएसएफ के वीडियो देखकर तकनीक सीखी और वरिष्ठ खिलाड़ियों से मार्गदर्शन लिया। 2019 में उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में जूनियर पदक जीता।
राष्ट्रीय शिविरों, कोचों और एनआरएआई के सहयोग ने उनके सफर को आगे बढ़ाया। अब नीरज का लक्ष्य एशियाई खेलों में देश के लिए पदक जीतने के साथ ओलंपिक पदक हासिल करना है।



