कानपुर

क्लिनिक प्लस माँ और बेटी के उस रिश्ते को सलाम करता है जिसमें दोनों चुपचाप एक-दूसरे की ताकत बन जाती हैं

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कानपुर : माँ की मजबूरी नहीं, बेटी होती है माँ की मजबूती’यही विचार क्लिनिक प्लस की नई फिल्म के केंद्र में है। डॉटर्स डे से ठीक पहले क्लिनिक प्लस माँ और बेटी के उस रिश्ते को सलाम करता है, जिसमें दोनों चुपचाप एक-दूसरे की ताकत बन जाती हैं। भारतीय घरों में माँएँ हमेशा से अपनी बेटियों को अपने हक के लिए खड़े होना और अपनी आवाज़ पहचानना सिखाती आई हैं जबकि उनसे खुद उम्मीद की जाती है कि वे चुप रहें, समझौते करें और अपने हिस्से की तकलीफ़ें खामोशी से सह लें। लेकिन जो बाकी दुनिया से छूट जाता है, बेटी वही देख लेती है। वह अपनी माँ के अनकहे त्याग को सहज ही पढ़ लेती है और मुश्किल घड़ी में उसके संयम को आत्मसात कर लेती है। यह फिल्म आज की बेटी को सिर्फ़ पाली-पोसी जाने वाली संतान के रूप में नहीं, बल्कि अपनी माँ के सबसे बड़े सहारे के रूप में सामने रखती है एक ऐसी हमराज़, जिसकी संवेदनशीलता, खामोश मौजूदगी और भरोसा माँ को आगे बढ़ने और खुद को चुनने का हौसला देता है।हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) में ब्यूटी एंड वेलबीइंग की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हरमन ढिल्लों ने कहा एक माँ अपनी बेटी को मजबूत,संवेदनशील और आत्मनिर्भर बनाती है, और एक दिन वही बेटी माँ का सबसे बड़ा सहारा बन जाती है। यह फिल्म उसी खूबसूरत बदलाव का उत्सव है, जहाँ माँ का दिया हुआ आत्मविश्वास लौटकर उसी का संबल और हौसला बन जाता है। हम यह कहानी देश की उन 1.3 करोड़ सिंगल मदर्स को समर्पित करते हैं, जिनकी जीवटता न सिर्फ़ उनकी बेटियों का भविष्य गढ़ती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बेटी होती है माँ की मजबूती। यह अभियान मजबूत बेटियाँ गढ़ने वाली माँओं के साथ क्लिनिक प्लस के लंबे रिश्ते को आगे बढ़ाता है। इस डॉटर्स डे पर क्लिनिक प्लस माँ-बेटी के रिश्ते में आए एक गहरे बदलाव को सामने रखता है जिन हाथों ने कभी बेटी को मजबूत बनना सिखाया था,आज वही हाथ बेटी ने थाम रखे हैं। कभी-कभी माँ अपनी बेटी को जो ताकत देती है, वह घूमकर उसी के पास लौट आती है।
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