बरेली
मीरा ने लोक लाज छोड़ कृष्ण को माना पति – देवकीनंदन महाराज

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली। बाबा त्रिवटी नाथ मंदिर के कृष्ण कथा स्थल पर बुधवार को वृंदावन से पधारे स्वामी देवकीनंदन महाराज ने भक्त शिरोमणि मीराबाई के चरित्र की लीला का मंचन कराया।
महाराज ने बताया कि मीरा का जन्म मेवाड़ के कुड़की गांव में हुआ था। पिता रतन सिंह और माता वीर कुमारी थीं, गुरु संत रविदास थे। बचपन में पड़ोस में शादी देखकर मीरा ने मां से पूछा मेरा दूल्हा कौन है, तो मां ने कृष्ण की मूर्ति देकर कहा यही तेरा दूल्हा है, बस मन में वही छवि बस गई। बड़े होने पर उनका विवाह राणा सांगा के पुत्र भोजराज से हुआ, लेकिन कुछ समय बाद पति का निधन हो गया। मीरा बचपन से ही कृष्ण को पति मानकर भक्ति में लीन रहतीं और साधु-संतों के साथ भजन करती थीं, जिससे राजपरिवार परेशान रहता था। उन्हें जहर का प्याला भी दिया गया, लेकिन उनका कुछ नहीं बिगड़ा। बाद में वह वृंदावन होते हुए द्वारका चली गईं और डाकोर में रहीं, जो अब रणछोड़ जी के नाम से जाना जाता है।
कथा में आनंद आश्रम के अध्यक्ष स्वामी ज्योतिर्मयानंद सरस्वती का आशीर्वाद मिला। मुख्य यजमान प्रेम शंकर अग्रवाल, सज्जन नेमानी और शिव कुमार खंडेलवाल रहे। कमेटी से मोहन गुप्ता, विकास शर्मा, मीडिया प्रभारी कैलाश शर्मा, नवीन गोयल, मुकेश अग्रवाल सहित सदस्य मौजूद रहे।




