गाजियाबाद
लोनी तिराहा: सड़क पर ट्रैफिक कम, ‘अपनी-अपनी दुकान’ ज्यादा!
रेहड़ी पटरी वालों का कब्जा जाम में रोज जल रहा लाखों का ईंधन और बर्बाद हो रहा लोगों का कीमती समय

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : दिल्ली-सहारनपुर मुख्य मार्ग का प्रमुख केंद्र लोनी तिराहा इन दिनों यातायात अव्यवस्था का ऐसा केंद्र बन गया है, जहां सड़क पर वाहन चलने से ज्यादा खड़े दिखाई देते हैं। ई-रिक्शा और ऑटो चालकों की मनमानी, सड़क पर बेतरतीब पार्किंग, रेहड़ी-पटरी वालों का अतिक्रमण और यातायात व्यवस्था संभालने वाले जिम्मेदारों की कथित निष्क्रियता ने आम राहगीरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालात ऐसे हैं कि चंद मिनट का सफर कई बार घंटों में पूरा हो रहा है।
दिल्ली-सहारनपुर मार्ग पर चल रहे निर्माण कार्य ने पहले ही सड़क की चौड़ाई कम कर दी है। ऐसे में बची-खुची सड़क पर यदि ई-रिक्शा और ऑटो चालक सवारियों के इंतजार में कई कतारों में वाहन खड़े कर दें तो जाम लगना तय है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोनी तिराहे पर ऑटो और ई-रिक्शा के लिए कोई प्रभावी और व्यवस्थित स्टैंड नहीं होने के कारण चालक जहां जगह मिली, वहीं वाहन रोककर सवारी बैठाने लगते हैं।
‘पहले मेरी सवारी’ की होड़ में सड़क बनी पार्किंग
लोनी तिराहे पर यातायात व्यवस्था का आलम यह है कि सवारी बैठाने की होड़ में कई ऑटो और ई-रिक्शा चालक सड़क के बीच में ही वाहन रोक देते हैं। कई बार वाहन आड़े-तिरछे खड़े होकर सड़क की कई लेन घेर लेते हैं। पीछे से आने वाले बस, ट्रक और अन्य भारी वाहनों को निकलने के लिए जगह नहीं मिलती और देखते ही देखते वाहनों की कतार लंबी होती चली जाती है।
ऐसा लगता है मानो तिराहा यातायात के लिए नहीं, बल्कि ‘जिसकी सवारी पहले, उसकी गाड़ी पहले’ के अनौपचारिक नियम पर चल रहा हो।
जाम में फंसकर जलता है ईंधन, समय की भी कीमत कौन देगा?
रोजाना लगने वाले जाम का असर केवल लोगों के गुस्से तक सीमित नहीं है। घंटों वाहनों के जाम में फंसे रहने से अनावश्यक रूप से पेट्रोल और डीजल की खपत होती है। हजारों वाहन जब बिना आगे बढ़े इंजन चालू रखकर खड़े रहते हैं तो रोजाना बड़ी मात्रा में ईंधन बर्बाद होता है।
इसके साथ ही नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, विद्यार्थियों, मरीजों और यात्रियों का कीमती समय भी जाम की भेंट चढ़ जाता है। यानी सड़क पर वाहन भले कुछ किलोमीटर ही चलें, लेकिन ईंधन का मीटर और लोगों की परेशानी दोनों लगातार दौड़ते रहते हैं।
ट्रैफिक पुलिस जाम खुलवाए या ‘एंट्री’ में व्यस्त रहे?
जाम से निपटने के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती तो रहती है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिसकर्मी कई बार जाम खुलवाने के बजाय दोपहिया और व्यावसायिक वाहनों की जांच तथा एंट्री कार्रवाई में अधिक व्यस्त नजर आते हैं। ऐसे में मुख्य सड़क पर वाहनों की कतार बढ़ती रहती है और यातायात व्यवस्था संभालने के लिए तैनात अमला दूसरी गतिविधियों में उलझा दिखाई देता है।
लोगों का सवाल है कि जब तिराहे पर वाहनों का पहाड़ खड़ा हो रहा हो, तब प्राथमिकता जाम हटाने की होनी चाहिए या सड़क किनारे कार्रवाई की?
रेहड़ी-पटरी ने भी छोड़ी नहीं कोई कसर
ई-रिक्शा और ऑटो की मनमानी के बीच रेहड़ी-पटरी वालों ने भी समस्या को और गंभीर बना दिया है। सड़क के किनारे और कई जगह सड़क के हिस्से पर ही रेहड़ियां खड़ी होने से वाहनों के लिए उपलब्ध जगह और कम हो जाती है।
एक तरफ निर्माण कार्य से सड़क पहले ही संकरी है, दूसरी तरफ ऑटो-ई-रिक्शा और रेहड़ियों ने बची हुई जगह पर भी कब्जा जमा रखा है। नतीजा—सड़क कम, अतिक्रमण ज्यादा और जाम सबसे ज्यादा।
एंबुलेंस फंसी तो कौन होगा जिम्मेदार?
सबसे गंभीर चिंता आपातकालीन सेवाओं को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जाम के कारण एंबुलेंस तक कई बार फंस जाती हैं। गंभीर मरीजों को दिल्ली या गाजियाबाद के अस्पतालों तक पहुंचाने में देरी होना सीधे तौर पर चिंता का विषय है।
इसी तरह स्कूल जाने वाले बच्चे भी रोजाना जाम की मार झेल रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि घर से समय पर निकलने के बावजूद जाम के कारण बच्चे स्कूल देर से पहुंचते हैं।
ऑटो में अतिरिक्त सीटें भी बनीं चिंता का कारण
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई ऑटो चालकों ने नियमों को दरकिनार कर वाहनों में अतिरिक्त सीटें लगवा रखी हैं। क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने की यह प्रवृत्ति दुर्घटना की स्थिति में गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। लोगों का कहना है कि परिवहन और यातायात विभाग को ऐसे वाहनों के खिलाफ नियमित और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
लोनी बॉर्डर पर भी कमोबेश यही हाल
लोनी तिराहे के साथ लोनी बॉर्डर क्षेत्र में भी यातायात दबाव और अव्यवस्था की शिकायतें सामने आती रही हैं। मुख्य मार्ग पर वाहनों का दबाव, अवैध पार्किंग, सवारी बैठाने की होड़ और सड़क किनारे अतिक्रमण मिलकर यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।
स्थायी समाधान की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कभी-कभार की चेकिंग और चालान से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने वाला। इसके लिए लोनी तिराहे पर स्थायी पुलिस बूथ, ऑटो और ई-रिक्शा के लिए निर्धारित स्टैंड तथा ड्रॉप-एंड-पिक जोन, सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने की नियमित कार्रवाई और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
लोगों की मांग है कि ट्रैफिक पुलिस और संबंधित विभाग संयुक्त अभियान चलाकर सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराएं तथा ऑटो-ई-रिक्शा संचालन के लिए स्पष्ट व्यवस्था लागू करें।
फिलहाल स्थिति यही है कि लोनी तिराहे पर जाम कोई अचानक आने वाली आफत नहीं, बल्कि रोज की कहानी बन चुका है। सड़क पर जगह तलाशते वाहन, सवारी तलाशते ऑटो, दुकान तलाशती रेहड़ियां और रास्ता तलाशते आम लोग सब एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इस तिराहे को यातायात व्यवस्था कब मिलेगी
