बालाघाट

डाइट के आवासों पर पात्र कर्मचारियों का हक दरकिनार

लिपिकों के कब्जे पर उठे सवाल

 निजी मकान होने और स्थानांतरण के बाद भी सरकारी आवास खाली नहीं करने के आरोप; कर्मचारी कांग्रेस ने जांच और कार्रवाई की मांग की
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बालाघाट। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), बालाघाट में शासकीय आवासों के आवंटन और उपयोग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए निर्धारित आवासों में लिपिकों के रहने की शिकायत करते हुए मध्यप्रदेश कर्मचारी कांग्रेस ने मामले की जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। संगठन का आरोप है कि पात्र कर्मचारी आवास के लिए आवेदन करने के बावजूद सुविधा से वंचित हैं, जबकि कुछ कर्मचारी सरकारी आवास खाली नहीं कर रहे हैं।
संगठन के सदस्य एवं डाइट में भृत्य के पद पर कार्यरत मुकेश वामनकर ने जुलाई 2026 से शासकीय आवास आवंटन के लिए आवेदन किया है, लेकिन अब तक उन्हें आवास नहीं मिला है। कर्मचारी कांग्रेस के अनुसार, आवास नहीं मिलने के कारण उन्हें रात में डाइट परिसर में रुकना पड़ता है और आवागमन में परेशानी होती है।
 निजी मकान और स्थानांतरण के बावजूद आवास पर सवाल
संगठन ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बालाघाट में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत अपूर्व बेल के डाइट परिसर स्थित शासकीय आवास में रहने पर सवाल उठाए हैं। कर्मचारी कांग्रेस का कहना है कि उनके पास निजी मकान भी है। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि डाइट प्राचार्य द्वारा आवास खाली करने के लिए पत्र जारी किए जाने के बावजूद आवास रिक्त नहीं किया गया। आवास पर ताला लगे रहने और देखरेख के अभाव में उसकी स्थिति प्रभावित होने की बात भी कही गई है।
इसके अलावा, डाइट से सामनापुर स्थानांतरित किए गए लिपिक राजेश यादव द्वारा भी आवास खाली नहीं किए जाने का आरोप सामने आया है। इन परिस्थितियों में आवासों की पात्रता, आवंटन आदेश और वर्तमान उपयोग की स्थिति की जांच की मांग उठ रही है।
 आवंटन के नियम सार्वजनिक करने की मांग
कर्मचारी कांग्रेस ने विभाग से आवास आवंटन संबंधी अभिलेखों, संबंधित कर्मचारियों की पात्रता और सेवा पुस्तिका में दर्ज पते के आधार पर जांच कराने का आग्रह किया है। संगठन की मांग है कि नियमों के विपरीत आवास का उपयोग पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए और पात्र कर्मचारी मुकेश वामनकर को आवास उपलब्ध कराने पर निर्णय लिया जाए। संगठन ने यह भी कहा है कि कार्रवाई में विलंब होने पर मामला कलेक्टर के समक्ष रखा जाएगा।
अब सवाल यह है कि डाइट प्रबंधन आवास आवंटन की स्थिति स्पष्ट कर पात्र कर्मचारियों को उनका अधिकार दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है। मामले में संबंधित विभाग और कर्मचारियों का पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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