बालाघाट

महाबोधि महाविहार के प्रबंधन की मांग को लेकर 20 अक्टूबर को नागपुर में शांति रैली

धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस पर बौद्ध अनुयायियों से आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

बालाघाट। महाबोधि महाविहार, बोधगया का प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों को सौंपने और बोधगया टेम्पल मैनेजमेंट कमेटी अधिनियम, 1949 (BTMC Act) को निरस्त करने की मांग को लेकर 20 अक्टूबर 2026 को नागपुर में विशाल शांति रैली निकाली जाएगी। महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति के मध्यप्रदेश प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता संजय खोबरागड़े ने बौद्ध अनुयायियों से रैली में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

खोबरागड़े ने बताया कि रैली संविधान चौक, नागपुर से दीक्षाभूमि तक निकाली जाएगी। दोपहर 12 बजे प्रस्तावित इस कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के पदाधिकारियों और बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आंदोलन का उद्देश्य महाबोधि महाविहार के प्रबंधन में बौद्ध समुदाय की निर्णायक भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग को व्यापक स्तर पर उठाना है।

उन्होंने कहा कि डॉ. बाबा साहब आंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में धम्म दीक्षा ग्रहण करने के लिए लाखों लोगों को प्रेरित किया था। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष अशोक विजयादशमी पर धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष 70वें धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस के अवसर पर महाबोधि महाविहार के प्रबंधन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।

प्रबंधन व्यवस्था में बदलाव की मांग

महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति के जिला अध्यक्ष विकास खांडेकर ने कहा कि बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। समिति का कहना है कि इस ऐतिहासिक स्थल के प्रबंधन में बौद्ध समुदाय को प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए। जिला अध्यक्ष भोजराज वासनिक ने भी समाज के लोगों से इस विषय पर चर्चा कर आंदोलन के उद्देश्य से अन्य अनुयायियों को अवगत कराने की अपील की।

समिति के अनुसार, बोधगया मंदिर के प्रबंधन को लेकर वर्ष 1949 में बनाए गए कानून के तहत गठित प्रबंधन समिति में बौद्ध और गैर-बौद्ध सदस्यों के साथ जिला कलेक्टर की भूमिका निर्धारित है। आंदोलन से जुड़े संगठनों का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में बदलाव कर महाविहार का प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों को सौंपा जाना चाहिए। समिति ने इस मांग के समर्थन में वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट में इंटरवेंशन पिटीशन प्रस्तुत किए जाने की जानकारी भी दी।

समिति के प्रदेश महासचिव अशोक अश्वघोष ने बताया कि इस मांग को लेकर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विभिन्न बौद्ध संगठनों और सामाजिक-धार्मिक संगठनों से आंदोलन का समर्थन करने तथा 20 अक्टूबर को नागपुर में आयोजित शांति रैली में शामिल होने का आह्वान किया।

समिति के पदाधिकारियों के अनुसार, रैली में राष्ट्रीय स्तर के बौद्ध संगठनों के प्रतिनिधियों और भिक्षु संघों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों ने कार्यक्रम के माध्यम से महाबोधि महाविहार के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनजागरूकता लाने का लक्ष्य रखा है।

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