बालाघाट
मौदा पंचायत में 19 लाख के भुगतान पर सवाल, बिना काम राशि निकालने का आरोप
आंगनवाड़ी में गट्टू लगाए बिना 2.39 लाख के भुगतान का दावा; स्वल्पाहार और निर्माण कार्यों की राशि दूसरे खातों में डालने के आरोप, ग्रामीणों ने मांगी निष्पक्ष जांच

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट/किरनापुर। किरनापुर जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली मौदा ग्राम पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने सरपंच मनमोहन वैध पर बिना काम कराए भुगतान निकालने, फर्जी बिल लगाने और पंचायत की राशि दूसरे लोगों के बैंक खातों में जमा कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, विभिन्न कार्यों के नाम पर करीब 19 लाख रुपये के भुगतान की जांच की जानी चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के अंतर्गत आंगनवाड़ी में गट्टू लगाए बिना ही करीब 2.39 लाख रुपये की राशि निकाल ली गई। इस कार्य की जियो टैगिंग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि संबंधित कार्य की वास्तविक स्थिति, भुगतान संबंधी दस्तावेजों और जियो टैगिंग की जांच कराई जाए।
स्वल्पाहार की राशि पंच के खाते में डालने का आरोप
मौदा पंचायत के पंच लाकेश्वर जुंजारे के अनुसार, 15 अगस्त के कार्यक्रम में स्वल्पाहार के नाम पर 10 हजार रुपये का बिल लगाया गया। उनका आरोप है कि यह राशि स्वल्पाहार उपलब्ध कराने वाले दुकानदार के बजाय उनके बैंक खाते में जमा कराई गई। उन्हें बताया गया कि राशि गलती से उनके खाते में आ गई है और उसे निकालकर सरपंच को दे दें, ताकि दुकानदार को भुगतान किया जा सके। इस मामले में भुगतान की प्रक्रिया और राशि के वास्तविक उपयोग की जांच की मांग उठी है।
भृत्य के खाते में भी 50 हजार रुपये जमा कराने का दावा
पंचायत के भृत्य फिरोज रंगारे ने बताया कि सरपंच द्वारा उनके बैंक खाते में भी 50 हजार रुपये जमा कराए गए थे। उनके अनुसार, उन्हें बताया गया कि यह राशि सीसी सड़क निर्माण के मजदूरों के भुगतान के लिए है और इसे निकालकर सरपंच को देना है। फिरोज रंगारे का कहना है कि उन्होंने खाते से राशि निकालकर सरपंच को दे दी थी। इस कथन के आधार पर राशि के हस्तांतरण और उसके वास्तविक उपयोग की जांच आवश्यक है।
हितेश गजभिए के खाते में लाखों के भुगतान पर सवाल
शिकायतकर्ता त्रिवेणी बनकर ने आरोप लगाया कि पंचायत के विभिन्न कार्यों के भुगतान में अनियमितताएं हुई हैं। उनके अनुसार, हितेश गजभिए के बैंक खाते में 10 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा कराई गई। इसमें नाली सफाई, स्ट्रीट लाइट और निर्माण कार्यों में पानी की तराई जैसे कार्यों के भुगतान शामिल होने का दावा किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्राम संगठन के माध्यम से जानकारी मांगे जाने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। हालांकि, इन भुगतानों की वास्तविक प्रकृति और कार्यों की स्थिति की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ग्रामीणों ने की कार्रवाई की मांग
पूर्व सरपंच हरिराम खरे सहित ग्रामीणों और वर्तमान पंच ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत में बिना कार्य कराए भुगतान निकालने और बिलों के माध्यम से राशि आहरित करने जैसी अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से भुगतान अभिलेखों, बिल-वाउचरों, बैंक खातों, जियो टैगिंग और मौके पर कराए गए निर्माण कार्यों का सत्यापन कराने की मांग की है।
मामले में सरपंच मनमोहन वैध का पक्ष तथा संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच के बाद ही वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।




