गाजियाबाद
लोनी बॉर्डर क्षेत्र में अवैध उगाही के आरोपों के बीच फल-फूल रहा रोडी-डस्ट व रेत का अवैध कारोबार
नहर किनारे सिंचाई विभाग की जमीन पर कब्जे का आरोप, धूल से परेशान स्थानीय निवासी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी (गाजियाबाद)। लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र में नहर किनारे संचालित रोडी, बदरपुर, डस्ट और रेत की दुकानों को लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। आरोप है कि इन दुकानों के कारण आसपास रहने वाले लोगों का जीवन मुश्किल हो गया है। वहीं, कारोबार से जुड़े कुछ लोगों पर सिंचाई विभाग की जमीन पर अवैध कब्जा कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि शिकायतें करने के बावजूद संबंधित पुलिस व सिंचाई विभाग के अधिकारियों की ओर से इनके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, नहर किनारे बड़ी संख्या में रोडी, बदरपुर, डस्ट और रेत की बिक्री की जा रही है। इन दुकानों से उड़ने वाली धूल आसपास की आबादी के लिए परेशानी का कारण बन रही है। लोगों का कहना है कि धूल के कारण घरों की छतों, दरवाजों, खिड़कियों और घरेलू सामान पर गंदगी की परत जम जाती है। तेज हवाएं चलने पर धूल के कण हवा में फैलकर लोगों की आंखों में पहुंचते हैं, जिससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सिंचाई विभाग की जमीन पर कब्जे के आरोप
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल नहर किनारे स्थित सिंचाई विभाग की जमीन के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दुकानदार सरकारी जमीन पर कब्जा करके अपना कारोबार चला रहे हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित विभाग की जिम्मेदारी तय करते हुए अतिक्रमण हटाने और नियमानुसार कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर इस तरह व्यावसायिक गतिविधियां चलने से न केवल सरकारी संपत्ति प्रभावित होती है, बल्कि आसपास के लोगों को भी लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
स्थानीय स्तर पर इस कारोबार को लेकर लोनी बॉर्डर थाना पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस टीम द्वारा इस अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगाई जा रही, जिससे कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं। कुछ स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कथित तौर पर दुकानदारों से वसूली के लिए थाने के एक सिपाही की ड्यूटी लगाई गई है।
ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना जरूरी है। यदि पुलिसकर्मियों की संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
ट्रैक्टरों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी सवाल
रोडी, बदरपुर, डस्ट और रेत के कारोबार में बड़ी संख्या में ट्रैक्टरों का इस्तेमाल किए जाने की बात भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ संचालक व्यावसायिक परिवहन के लिए आवश्यक पंजीकरण और नियमों का पालन करने के बजाय कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत ट्रैक्टरों का इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं। इससे परिवहन नियमों के पालन और सरकारी राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है
इस मामले में परिवहन विभाग को वाहनों के पंजीकरण, परमिट और उनके वास्तविक इस्तेमाल की जांच करनी चाहिए, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
जिम्मेदार विभाग कब करेंगे कार्रवाई?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि सिंचाई विभाग, परिवहन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े अधिकारी और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की जांच करें। नहर किनारे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट की जाए, धूल फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण के उपाय किए जाएं और कथित अवैध वसूली के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
लोगों का कहना है कि यदि आरोपों की अनदेखी होती रही, तो आम नागरिकों को धूल, गंदगी और कथित अवैध गतिविधियों की परेशानी झेलनी पड़ेगी। अब देखना यह है कि संबंधित अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करते हैं या नहर किनारे चल रहा यह कारोबार इसी तरह विवादों के बीच जारी रहता है
