कैराना की सियासत में नारी शक्ति का दबदबा, संसद से निकायों तक मजबूत मौजूदगी
तबस्सुम हसन और इकरा हसन ने लोकसभा चुनाव में दर्ज की जीत, मृगांका सिंह ने दी सियासी चुनौती; स्थानीय निकायों में भी महिलाओं की अहम भागीदारी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
शामली कैराना। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में कैराना की पहचान केवल चुनावी संघर्ष तक सीमित नहीं है। यहां महिला नेताओं ने भी अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास कराया है। लोकसभा चुनाव में तबस्सुम हसन और इकरा हसन की जीत से लेकर भाजपा की मृगांका सिंह के चुनावी संघर्ष तक, क्षेत्र की राजनीति में महिलाओं की भूमिका लगातार चर्चा में रही है। वहीं, स्थानीय निकायों में महिला जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी भी राजनीति में उनकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है।
तबस्सुम हसन ने दो बार हासिल की लोकसभा में जीत
कैराना की राजनीति में तबस्सुम हसन का अहम स्थान रहा है। उन्होंने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2018 के कैराना लोकसभा उपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल कर दोबारा संसद में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। उनकी दोनों चुनावी जीत ने कैराना की सियासत में महिला नेतृत्व की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
इकरा हसन की जीत से सपा को मिली मजबूती
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी इकरा हसन ने भाजपा के प्रदीप कुमार को 69,116 मतों से पराजित कर कैराना सीट पर जीत हासिल की। इस जीत के साथ इकरा हसन संसद पहुंचीं और राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई। उनके चुनावी प्रदर्शन ने कैराना की सियासत में महिला नेतृत्व को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।
मृगांका सिंह ने कई चुनावों में आजमाया दम
भाजपा की मृगांका सिंह भी कैराना की राजनीति का प्रमुख चेहरा रही हैं। उन्होंने वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में चुनावी मैदान में उतरकर अपनी दावेदारी पेश की। इसके अलावा, वर्ष 2018 के लोकसभा उपचुनाव में भी उन्होंने मुकाबला किया। हालांकि, उन्हें चुनावी सफलता नहीं मिली, लेकिन क्षेत्र की राजनीति में उनकी सक्रियता बनी रही।
निकायों में भी महिलाओं की भागीदारी
महिला नेतृत्व की तस्वीर केवल लोकसभा और विधानसभा तक सीमित नहीं है। कैराना नगर पालिका परिषद के 28 वार्डों में 10 महिला सभासदों का निर्वाचित होना स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को रेखांकित करता है। ग्राम पंचायतों और अन्य स्थानीय निकायों में भी महिलाएं जनप्रतिनिधि के रूप में जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
हालांकि, महिला सशक्तीकरण का आकलन केवल चुनाव जीतने या प्रतिनिधित्व के आंकड़ों से नहीं किया जा सकता। महत्वपूर्ण यह भी है कि महिला जनप्रतिनिधियों को निर्णय लेने की कितनी स्वतंत्रता हासिल है और वे जनसमस्याओं के समाधान तथा विकास कार्यों में कितनी प्रभावी भूमिका निभा रही हैं।
प्रतिनिधित्व के साथ निर्णय की आजादी भी जरूरी
कैराना की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक सशक्तीकरण को व्यापक बनाने के लिए सामान्य परिवारों से आने वाली महिलाओं को भी आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए। उन्हें राजनीतिक संसाधनों, संगठनात्मक सहयोग और स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार मिलना जरूरी है।
संसद से लेकर स्थानीय निकायों तक महिलाओं की मौजूदगी लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है। अब असली चुनौती इस भागीदारी को स्वतंत्र नेतृत्व, जनहित के फैसलों और विकास कार्यों में प्रभावी भूमिका में बदलने की है।

