कोविड टीकाकरण के नकारात्मक प्रभाव
पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की सख्त हिदायत।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम : कोविड-19 प्रतिरोधक टीके लगवाने के परिणामस्वरूप होने वाली साइड इफेक्ट्स या किसी भी प्रकार के नकारात्मक प्रभावों का शिकार हुए लोगों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को पीड़ितों के लिए शीघ्र ही एक ‘नो-फॉल्ट क्षतिपूर्ति नीति’ (No-fault compensation policy) तैयार करने का निर्देश दिया है। इस निर्देश के माध्यम से टीके के कारण स्वास्थ्य में गंभीर गिरावट का शिकार हुए लोग या समयपूर्व मृत्यु का दंश झेलने वाली उनके परिजनों को सरकार से उचित आर्थिक सहायता प्राप्त करने का रास्ता प्रशस्त हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्देशानुसार सरकार द्वारा तैयार की जाने वाली ‘नो-फॉल्ट क्षतिपूर्ति’ नीति का अर्थ है कि पीड़ित को मुआवजे का दावा करने के लिए टीका निर्माता कंपनी या सरकार की लापरवाही साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यद्यपि कोविड टीकाकरण अभियान ने लाखों लोगों की जान बचाई है, फिर भी इसके साइड इफेक्ट्स से प्रभावित हुए कुछ लोगों के प्रति राष्ट्र की जिम्मेदारी नकारा नहीं जा सकता। टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाओं से जीवन और जीविका गंवाने वालों की सहायता करना एक कल्याणकारी राज्य का प्राथमिक कर्तव्य है, ऐसा न्यायालय ने दोहराया।उल्लेखनीय है कि कोविड वैक्सीन लेने के बाद अपने परिजन खो चुके कई परिवारों और स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं से जूझ रहे लोगों ने न्याय की खातिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि सरकार ने टीकाकरण को एक प्रकार से अनिवार्य बना दिया था और जनता को इसके लिए बार-बार प्रोत्साहित किया था। ऐसे में, यदि कोई व्यक्ति वैक्सीन लेने के बाद गंभीर रूप से प्रभावित होता है, तो उसका पूरा नैतिक और आर्थिक दायित्व सरकार को निभाना चाहिए। इन याचिकाओं की सुनवाई के बाद न्यायालय ने सरकार को यह महत्वपूर्ण निर्देश दिया। यह निर्णय न केवल पीड़ितों के लिए राहत का काम करेगा, बल्कि भविष्य के टीकाकरण अभियानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।



