बागपत

वरिष्ठ शिक्षक मास्टर राजवीर सिंह से खास बातचीत 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बागपत। शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण और निरंतर सेवा का नाम हैं मास्टर राजवीर सिंह। वर्ष 1995 में इन्होंने श्री कृष्ण इंटर कॉलेज में अंग्रेजी विषय के लैक्चरार के रूप में अपनी सेवाएं शुरू कीं। लगभग 4 वर्षों तक वहां विद्यार्थियों को अंग्रेजी शिक्षा देने के बाद, उन्होंने बड़ा गांव में लगातार अपनी सेवाएं जारी रखीं और आज भी शिक्षा की अलख जगा रहे हैं।
 साक्षात्कार – सुरेंद्र मलानिया के साथ
 सवाल (सुरेंद्र मलानिया):
आपने 1995 में अपनी शिक्षण यात्रा शुरू की, उस समय का अनुभव कैसा रहा?
 जवाब (मास्टर राजवीर सिंह):
उस समय संसाधन बहुत सीमित थे, लेकिन बच्चों में सीखने की ललक बहुत थी। श्री कृष्ण इंटर कॉलेज में पढ़ाते हुए मैंने महसूस किया कि अगर शिक्षक ईमानदारी से पढ़ाए तो सीमित संसाधनों में भी अच्छा परिणाम दिया जा सकता है।
 सवाल:
अंग्रेजी जैसे विषय को गांव के छात्रों को पढ़ाना कितना चुनौतीपूर्ण रहा?
 जवाब:
शुरुआत में काफी चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि बच्चों का बेस कमजोर होता था। लेकिन मैंने हमेशा सरल भाषा और उदाहरणों के माध्यम से पढ़ाने की कोशिश की। धीरे-धीरे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने अच्छा प्रदर्शन करना शुरू किया।
 सवाल:
गढ़ी चौखंडी से बड़ा गांव तक के सफर को आप कैसे देखते हैं?
 जवाब:
यह सफर मेरे लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन रहा है। बड़ा गांव में मैंने बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें जीवन के मूल्यों और अनुशासन की भी शिक्षा दी।
 सवाल:
आज के शिक्षा सिस्टम में आप क्या बदलाव देख रहे हैं?
 जवाब:
आज तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है, जो अच्छी बात है। लेकिन शिक्षक और छात्र के बीच जो मानवीय संबंध होता है, उसे बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
 सवाल:
नए शिक्षकों के लिए आपका क्या संदेश है?
 जवाब:
शिक्षण को सिर्फ नौकरी न समझें, इसे एक जिम्मेदारी और सेवा के रूप में लें। बच्चों का भविष्य आपके हाथ में होता है, इसलिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपना कार्य करें।
 — सुरेंद्र मलानिया
मास्टर राजवीर सिंह जैसे शिक्षक समाज की असली पूंजी होते हैं। उनका समर्पण और सेवा भाव नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित किया कि एक शिक्षक अगर ठान ले, तो वह किसी भी परिस्थिति में बदलाव ला सकता है।
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