बागपत

बढ़ती गर्मी और उमस में बिना डॉक्टर की सलाह के न लें कोई भी दवा

कई गंभीर बीमारियों से बचने के लिए बरतें सावधानी: विशेषज्ञ चिकित्सक दंपति

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बागपत। देशभर में बढ़ती गर्मी और उमस ने लोगों की दिनचर्या और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। तापमान में लगातार वृद्धि और वातावरण में नमी बढ़ने के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, वायरल संक्रमण, माइग्रेन, ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव तथा डायबिटीज जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे मौसम में लोग अक्सर छोटी-मोटी परेशानी होने पर बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाइयां लेना शुरू कर देते हैं, जो कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
प्रसिद्ध न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अपूर्व तोमर (DM न्यूरोलॉजी, GB Pant Hospital, दिल्ली) एवं एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. शिवेंदु भारद्वाज (DM एंडोक्राइनोलॉजी, SGPGI लखनऊ) ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि मौसम में बदलाव के दौरान स्वास्थ्य के प्रति विशेष सतर्कता बरतना बेहद आवश्यक है। बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा लेना शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
डॉ. अपूर्व तोमर का कहना है कि गर्मी और उमस के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे सिरदर्द, चक्कर आना, कमजोरी, माइग्रेन और कई न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई लोग सिरदर्द या कमजोरी को सामान्य समझकर स्वयं दवाइयां ले लेते हैं, जबकि कई बार यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में सही जांच और विशेषज्ञ परामर्श आवश्यक है।
वहीं डॉ. शिवेंदु भारद्वाज ने बताया कि उमस भरे मौसम में डायबिटीज, थायराइड और हार्मोन संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अत्यधिक गर्मी के कारण ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है और शरीर की कार्यप्रणाली पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं की मात्रा में बदलाव करना खतरनाक हो सकता है।
इन बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा
गर्मी और उमस के मौसम में विशेष रूप से निम्नलिखित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है—
हीट स्ट्रोक और हीट एग्जॉशन
डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी)
वायरल फीवर और संक्रमण
माइग्रेन और सिरदर्द
स्ट्रोक का खतरा
डायबिटीज की जटिलताएं
ब्लड प्रेशर की समस्या
थायराइड और हार्मोन असंतुलन
पेट संबंधी संक्रमण और फूड पॉइजनिंग
स्वस्थ रहने के लिए अपनाएं ये महत्वपूर्ण उपाय
विशेषज्ञ चिकित्सकों के अनुसार कुछ साधारण सावधानियां अपनाकर कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है—
दिनभर पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीएं।
ओआरएस, नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी जैसे तरल पदार्थों का सेवन करें।
दोपहर के समय अनावश्यक रूप से धूप में बाहर निकलने से बचें।
बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें।
ताजा और हल्का भोजन करें।
कटे हुए फल और खुले खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें।
नियमित व्यायाम करें लेकिन अत्यधिक गर्मी में भारी शारीरिक श्रम से बचें।
पर्याप्त नींद लें और तनाव कम रखें।
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
समाज सेवा की परंपरा को आगे बढ़ा रहा चिकित्सक परिवार
डॉ. अपूर्व तोमर और डॉ. शिवेंदु भारद्वाज केवल अपने चिकित्सा ज्ञान के लिए ही नहीं, बल्कि समाज सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए भी जाने जाते हैं। दोनों प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थानों से उच्च चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण और छोटे शहरों के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
डॉ. अपूर्व तोमर, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुखपाल सिंह की पुत्री हैं, जबकि डॉ. शिवेंदु भारद्वाज उनके दामाद हैं। परिवार पिछले लगभग 36 वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। परिवार द्वारा संचालित स्वास्थ्य सेवाओं ने हजारों मरीजों को लाभ पहुंचाया है और अब नई पीढ़ी भी उसी सेवा भावना को आगे बढ़ा रही है।
दोनों विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी चिकित्सा सुविधाएं केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में भी लोगों को उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध होना चाहिए। इसी सोच के साथ वे मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में जुटे हैं।
समय पर जांच ही सबसे बड़ी सुरक्षा
विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि अधिकांश गंभीर बीमारियों का सफल उपचार तभी संभव है जब उनकी पहचान समय रहते हो जाए। लोग अक्सर बीमारी को नजरअंदाज करते रहते हैं और जब तक डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तब तक स्थिति जटिल हो चुकी होती है।
डॉ. अपूर्व तोमर और डॉ. शिवेंदु भारद्वाज ने लोगों से अपील की है कि बढ़ती गर्मी और उमस के इस मौसम में अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें, पर्याप्त पानी पीएं, संतुलित भोजन करें और किसी भी प्रकार की दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। उनका संदेश है कि “स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, समय पर जांच और विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह ही गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।”
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