झारखंड

ट्रेजरी घोटाले पर झारखंड सरकार की सख्ती, संविदा ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से दूर रखने का फरमान

Jharkhand government cracks down on treasury scam, Orders contract operators to be kept away from financial work

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची। झारखंड में सामने आए बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर कड़े और निर्णायक कदम उठाए हैं। वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों से पूरी तरह अलग रखने का आदेश दिया है।
घोटाले की पृष्ठभूमि और कारण
हाल के दिनों में हजारीबाग, बोकारो और रांची समेत कई जिलों के कोषागारों में वेतन मद से अवैध निकासी के चौंकाने वाले मामले उजागर हुए हैं। जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों के डेटा में हेरफेर कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और करोड़ों रुपये की निकासी की गई। कुछ मामलों में तो मृत या सेवानिवृत्त व्यक्तियों के नाम पर वर्षों तक भुगतान जारी रहा। प्राथमिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनात लेखा कर्मियों—जैसे एकाउंटेंट और वाउचर क्लर्क—की भूमिका संदिग्ध रही है। प्रशासन का मानना है कि स्थायित्व और निगरानी की कमी ने इस तरह की वित्तीय गड़बड़ियों को बढ़ावा दिया।
सरकार के नए निर्देश
जारी आदेश के तहत:
संविदा या मानदेय पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर अब किसी भी प्रकार के वित्तीय कार्य—जैसे वेतन बिल तैयार करना, भुगतान प्रक्रिया या अकाउंट्स प्रबंधन—में शामिल नहीं होंगे। तीन वर्षों से अधिक समय से एक ही स्थान पर कार्यरत लेखा कर्मियों का तत्काल स्थानांतरण किया जाएगा।
सभी विभागों को 30 मई 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट वित्त विभाग को सौंपनी अनिवार्य होगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
सरकार का यह कदम प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। साथ ही, राज्य के सभी कोषागारों का व्यापक ऑडिट भी शुरू कर दिया गया है ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितताओं को चिन्हित कर कार्रवाई की जा सके।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच की मांग
इस मुद्दे पर विपक्षी दल भाजपा ने पहले ही सीबीआई या न्यायिक जांच की मांग उठाई है। वहीं, राज्य सरकार ने फिलहाल आंतरिक जांच प्रक्रिया को तेज करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। ट्रेजरी घोटाले ने प्रशासनिक तंत्र की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। ऐसे में सरकार के ताजा निर्देश न केवल सुधारात्मक कदम हैं, बल्कि भविष्य में वित्तीय अनियमितताओं को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी माने जा रहे हैं।

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