बागपत

दादी की स्मृति में सामाजिक संदेश

तेरहवीं पर परिवार ने लगाया ‘माँ के नाम’ पौधा, विधायक योगेश धामा भी बने सहभागी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत। शोक की घड़ी को सामाजिक चेतना में बदलने की एक प्रेरणादायक मिसाल बागपत जनपद में देखने को मिली, जहां एक परिवार ने अपनी स्वर्गीय दादी की तेरहवीं के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए पौधारोपण किया। परिवार ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से प्रेरणा लेकर बागपत विधानसभा क्षेत्र के विधायक योगेश धामा के साथ पौधा लगाया और समाज को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर परिवार के सदस्य ओमपाल, सुरेन्द्र मलानिया, सत्यपाल सिंह, जयभगवान सहित अन्य परिजन एवं ग्रामीण मौजूद रहे।
कार्यक्रम भावनाओं, संस्कारों और सामाजिक जिम्मेदारी का अनूठा संगम बन गया। जहां एक ओर परिवार अपनी स्वर्गीय दादी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था, वहीं दूसरी ओर समाज को पर्यावरण बचाने का संदेश भी दिया जा रहा था। परिवारजनों ने कहा कि उनकी दादी हमेशा प्रकृति प्रेम, सेवा और पारिवारिक संस्कारों की प्रेरणा रही हैं। यही कारण है कि उनकी स्मृति को केवल रस्मों तक सीमित न रखकर समाजहित से जोड़ने का निर्णय लिया गया।
विशेष बात यह रही कि इस पहल को उत्तर प्रदेश में तेजी से जनआंदोलन का रूप ले रहे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान से भी जोड़ा गया। प्रदेश में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम बनकर नहीं रह गया है, बल्कि इसे संस्कृति, संवेदना और सामूहिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया है। यही कारण है कि यह पहल अब गांव-गांव पहुंचकर सामाजिक आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। लोग अपने जीवन के विशेष अवसरों—जन्मदिन, विवाह, पुण्यतिथि और तेरहवीं जैसे संस्कारों—को पौधारोपण से जोड़ रहे हैं।
विधायक योगेश धामा ने परिवार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में समाज को ऐसे सकारात्मक उदाहरणों की सबसे अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि एक पौधा केवल पेड़ नहीं होता, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार होता है। यदि प्रत्येक परिवार अपने पूर्वजों और माताओं की स्मृति में पौधा लगाए, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान ने लोगों के भीतर भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया है, जिसके कारण अब यह सरकारी योजना से आगे बढ़कर जनभागीदारी का अभियान बन चुका है।
परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनकी दादी को पेड़-पौधों से विशेष लगाव था। गांव में वे अक्सर लोगों को हरियाली बढ़ाने और प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा देती थीं। उन्होंने कहा कि आज बढ़ते प्रदूषण, गर्मी और घटते हरित क्षेत्र के बीच प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आना होगा। इसी सोच के साथ परिवार ने तेरहवीं जैसे भावुक अवसर को समाज के लिए प्रेरणा में बदलने का निर्णय लिया।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों ने भी इस पहल को अनुकरणीय बताया। लोगों का कहना था कि अक्सर तेरहवीं जैसे आयोजनों में केवल परंपराएं निभाई जाती हैं, लेकिन इस परिवार ने समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि हर परिवार अपने पूर्वजों की स्मृति में पौधारोपण करे, तो गांवों और शहरों में हरियाली बढ़ाने का बड़ा अभियान खड़ा हो सकता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी लोगों ने पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लिया। बच्चों और युवाओं को भी प्रकृति संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। परिवार ने कहा कि वे आगे भी समय-समय पर पौधारोपण अभियान चलाकर समाज को जागरूक करने का कार्य करेंगे। तेरहवीं जैसे भावुक अवसर को सामाजिक चेतना और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की यह पहल अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्वर्गीय दादी की स्मृति में लगाया गया यह पौधा आने वाले वर्षों में केवल एक वृक्ष नहीं रहेगा, बल्कि परिवार के संस्कार, प्रकृति प्रेम और समाज के प्रति जिम्मेदारी का जीवंत प्रतीक बनेगा।
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