संभल

संभल में वर्धमार नदी के पुनर्जीवन का शुभारंभ

डीएम-एसपी ने फावड़ा चलाकर शुरू कराया अभियान

“एक जनपद, पाँच नदियाँ” अभियान के तहत 14.5 किलोमीटर लंबी नदी को मिलेगा नया जीवन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो

संभल। जनपद में जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शनिवार को विकासखंड गुन्नौर के ग्राम बाघऊ में वर्धमार नदी पुनर्जीवन अभियान का विधिवत शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल और पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर नारियल फोड़ा तथा फावड़ा चलाकर नदी पुनरुद्धार कार्य का शुभारंभ कराया।

पाँच नदियाँ अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी रही। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने नदी संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए जनसहभागिता को इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बताया।

जिलाधिकारी अंकित खण्डेलवाल ने कहा कि बदलते पर्यावरणीय परिदृश्य में जल स्रोतों का संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जनपद की कई प्राचीन नदियाँ अतिक्रमण, गाद जमाव और उपेक्षा के कारण अपने अस्तित्व को खोती जा रही हैं। इन्हीं नदियों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि लगभग 14.5 किलोमीटर लंबी वर्धमार नदी गुन्नौर और जुनावई क्षेत्र से होकर बहती है तथा आगे जाकर महावा नदी में मिलती है। वर्षों से उपेक्षा का शिकार रही इस नदी की मूल धारा को पुनर्स्थापित करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया जाएगा।

अतिक्रमण हटाने के साथ होगा संरक्षण कार्य

प्रशासन द्वारा नदी के पुनर्जीवन के लिए अतिक्रमण हटाने, खुदाई कराने, जलधारा को पुनः विकसित करने, तटों पर पौधारोपण करने तथा दीर्घकालिक संरक्षण के उपाय किए जाएंगे। इसके साथ ही नदी के किनारे हरित पट्टी विकसित कर पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

जिलाधिकारी ने बताया कि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में स्थित ग्राम समाज की भूमि को पूर्व में अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है। इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने में मदद मिलेगी और भविष्य में जल संचयन क्षमता भी बढ़ेगी।

मनरेगा से मिलेगा रोजगार

नदी पुनरुद्धार कार्य को महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से जोड़ा गया है। इससे जहां एक ओर नदी संरक्षण का कार्य तेजी से पूरा होगा, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार भी उपलब्ध होगा। प्रशासन का मानना है कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार सृजन का सफल मॉडल साबित हो सकता है।

भूजल स्तर सुधारने में मिलेगी मदद

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्धमार नदी के पुनर्जीवित होने से क्षेत्र में भूजल स्तर में सुधार होगा, किसानों को सिंचाई में सुविधा मिलेगी तथा वर्षा जल का बेहतर संचयन संभव हो सकेगा। इसके अलावा नदी के किनारे जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलेगी।

अधिकारियों ने की जनसहभागिता की अपील

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे नदी संरक्षण अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दें तथा नदी के किनारे अतिक्रमण, प्रदूषण और अवैध गतिविधियों को रोकने में प्रशासन का सहयोग करें।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी गोरखनाथ भट्ट, जिला विकास अधिकारी राम आशीष, उपजिलाधिकारी गुन्नौर विकास चन्द्र, सिंचाई विभाग के अधिकारी, ग्राम प्रधान, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

प्रशासन का कहना है कि जनपद की अन्य विलुप्तप्राय नदियों के पुनर्जीवन के लिए भी इसी प्रकार के अभियान आगे चलाए जाएंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

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