
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व सरमा नेतृत्वकारी भाजपा गठबंधन सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले (बदलियाँ) से जुड़ी परंपरागत ‘रिलीज़ ऑर्डर’ प्रथा को समाप्त करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम तबादला प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और जटिलताओं को दूर कर सेवाओं के सुचारू संचालन तथा कर्मचारियों के हित में परिणाम देगा।नई नीति के अनुसार अब तबादला आदेशों के लागू होने के लिए अलग से रिलीज़ ऑर्डर जारी करने की प्रथा नहीं रहेगी। इसके स्थान पर स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOP), समय-सीमाएँ और डिजिटलीकृत प्रक्रिया अपनाई जाएँगी ताकि तबादले पारदर्शी, तेज़ और जवाबदेह बन सकें। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि मानव संसाधन विभाग और संबंधित विभाग नई व्यवस्था लागू करने के लिए शीघ्र दिशा-निर्देश जारी करें।सरकार ने बताया कि पुराने रिलीज़ ऑर्डर प्रावधान के कारण कई बार अधिकारियों के हस्तांतरण में देरी होती थी, जिससे प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते थे और कर्मचारी व्यक्तिगत व पेशेवर असुविधाओं का सामना करते थे। नई व्यवस्था में संवेदनशील विभागों या विशेष परियोजनाओं के मामलों के लिए आवश्यक सुरक्षा और शर्तें रखी जाएँगी, ताकि प्रशासनिक आवश्यकताओं व कर्मचारियों के अधिकारों के बीच संतुलन बना रहे। प्रमुख प्रभाव और उपाय: तबादले अब निर्धारित समय-सीमाओं के भीतर डिजिटल रूप से रिकॉर्ड और लागू होंगे, जिससे देरी घटेगी।पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल और ट्रैकिंग सिस्टम जारी किया जाएगा। अनुचित या मनमाने तबादलों की शिकायत निवारण हेतु सशक्त तंत्र बनाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील पदों पर स्थानांतरण के लिए अलग प्रावधान और सुरक्षा शर्तें लागू रहेंगी। संबंधित विभागों को नए SOP तैयार कर कर्मचारियों को सूचना देने तथा प्रशिक्षण देने को कहा गया है। प्रशासकीय सुधारों के जानकारों का अनुमान है कि यदि नए नियम सही तरीके से लागू किए गए तो यह लोकसेवा वितरण में सुधार, निर्णयों की जवाबदेही और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि डिजिटलीकरण, निगरानी और प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि प्रणाली का दुरुपयोग न हो। सरकार ने कहा है कि विस्तृत दिशा-निर्देश और लागू करने की समय-सीमा शीघ्र घोषित की जाएगी।



